बहराइच ( पयागपुर तहसील )। मोहर्रम के अवसर पर पयागपुर क्षेत्र में निकले पायकों ने एक बार फिर लोक कला, परंपरा, आस्था और सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल पेश की। रंग-बिरंगे परिधानों, मोर छड़ी और पारंपरिक वेशभूषा में सजे पायकों का अनूठा अंदाज लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। पूरे रास्ते श्रद्धालुओं की भीड़ पायकों के दर्शन और उनसे झाड़ा लगवाने के लिए उमड़ती रही।मान्यता है कि जिन लोगों की मनौती पूरी हो जाती है, वे मोहर्रम के अवसर पर पायक बनकर पदयात्रा करते हैं। हाथों में मोर छड़ी लेकर नंगे पांव चलने वाले पायक रास्ते में मिलने वाले लोगों को श्रद्धा के साथ झाड़ा देते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि पायकों की मोर छड़ी से झाड़ा लगवाने से शारीरिक कष्ट, नकारात्मक ऊर्जा और विभिन्न प्रकार की परेशानियां दूर होती हैं तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।मोहर्रम के दौरान सबसे खास बात यह देखने को मिली कि पायकों से झाड़ा लगवाने वालों में केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि हिंदू सहित अन्य धर्मों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल रहे। सभी ने बिना किसी भेदभाव के आस्था के साथ पायकों से आशीर्वाद लिया। यह दृश्य क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।बुजुर्गों के अनुसार पायक की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है।read more:https://pahaltoday.com/school-chalo-campaign-increased-awareness/ हर वर्ष मोहर्रम के अवसर पर मनौती पूरी होने पर लोग पायक बनते हैं और पूरे अनुशासन एवं श्रद्धा के साथ पैदल यात्रा कर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज, “या हुसैन” की सदाएं और पारंपरिक लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।रास्ते भर लोगों ने पायकों का स्वागत किया तथा जलपान और अन्य व्यवस्थाएं भी कीं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे पूरे कार्यक्रम का आयोजन शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।मोहर्रम के अवसर पर पायकों की यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोक संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता और सांप्रदायिक एकता का मजबूत संदेश भी देती नजर आई। यही कारण है कि हर वर्ष इस परंपरा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग उत्साह के साथ पहुंचते हैं।