डाला, सोनभद्र। निषाद पार्टी के बैनर तले सोमवार को निषाद समाज के लोगों ने तहसील स्तर पर ज्ञापन सौंपकर विमुक्त जनजाति (डीएनटी) एवं निषाद वंश की उपजातियों को अनुसूचित जाति (एससी) की सूची में शामिल करने की मांग उठाई। समाज के लोगों ने जातिगत जनगणना में निषाद वंश की पर्यायवाची जातियों को ‘मंझवार (डीटी)’ के रूप में दर्ज कर अलग से गणना किए जाने की मांग भी की।ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 1871 में ब्रिटिश शासन द्वारा क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट लागू कर निषाद समाज को अपराधी जनजाति घोषित किया गया था। बाद में 31 अगस्त 1952 को इस कानून को समाप्त किए जाने के बाद निषाद समाज को विमुक्त जनजाति (डी-नोटिफाइड ट्राइब) घोषित किया गया। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लेकर समाज द्वारा प्रत्येक वर्ष 31 अगस्त को विमुक्ति दिवस के रूप में मनाए जाने की बात कही गई। समाज के लोगों ने बताया कि केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, मंझवार, कश्यप, तुरैहा, मांझी और ढेवर समेत कई जातियां निषाद वंश से जुड़ी पर्यायवाची जातियां हैं। विभिन्न राज्यों में इन जातियों को अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों में रखे जाने से उत्तर प्रदेश में निषाद समाज को अपेक्षित संवैधानिक एवं आरक्षण संबंधी लाभ नहीं मिल पा रहा है।read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/ निषाद समाज ने जातिगत जनगणना के दौरान निषाद वंश की सभी पर्यायवाची जातियों को ‘मंझवार’ कॉलम में दर्ज करने तथा मंझवार (डीटी) विमुक्त जनजाति के रूप में अलग से गणना किए जाने की मांग की। समाज का कहना है कि इससे निषाद वंश की वास्तविक सामाजिक एवं जनसंख्या स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ज्ञापन में निषाद वंश की सभी पर्यायवाची जातियों को अन्य राज्यों की तर्ज पर अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने के साथ विमुक्त जनजातियों को शिक्षा, सरकारी नौकरियों और राजनीति में आरक्षण तथा पेंशन जैसी सुविधाएं देने की मांग की गई। इसके अलावा वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए निषाद समाज के वीरों के गांवों को ‘आदर्श शहीद गांव’ घोषित करने और उनके परिवारों को स्वतंत्रता सेनानी सम्मान एवं संबंधित सुविधाएं देने की मांग भी रखी गई। समाज के लोगों ने ज्ञापन के माध्यम से मांगों को मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंचाने की मांग की। इस दौरान निषाद पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद, प्रदेश महासचिव दयाशंकर निषाद, छोटेलाल निषाद, अशोक निषाद, रामचंद्र निषाद, नंदनी निषाद, राकेश निषाद, धर्मेंद्र निषाद, संदीप और मकचू समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।