मुंशी प्रेमचन्द की रचनाएं आज भी समाज को दिखाती हैं नई राह : साहित्य चेतना समाज ने जयंती पर किया साहित्यिक विमर्श

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गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के अंतर्गत उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द की जयंती पर नगर के सहकारी कॉलोनी, आमघाट स्थित संजीव त्रिपाठी के आवास पर विचार गोष्ठी एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुंशी प्रेमचन्द के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुदृष्टि बाबा पीजी कॉलेज रानीगंज, बलिया के प्राचार्य डॉ. संतोष कुमार सिंह ने की, जबकि संचालन हिन्दू इंटर कॉलेज जमानियां की हिन्दी शिक्षिका डॉ. ऋचा राय ने किया।विचार गोष्ठी में डॉ. ऋचा राय ने कहा कि मुंशी प्रेमचन्द ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज के उस वर्ग को आवाज दी, जिसकी पीड़ा अक्सर अनसुनी रह जाती थी। उनके उपन्यास गोदान, गबन, निर्मला, रंगभूमि और कर्मभूमि आज भी सामाजिक सरोकारों के कारण प्रासंगिक हैं। उनकी कहानियां ईदगाह, पूस की रात, कफन, दो बैलों की कथा और पंच परमेश्वर मानवीय मूल्यों का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती हैं।साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने कहा कि प्रेमचन्द का साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का माध्यम था। किसान, मजदूर, महिलाएं, दलित, शोषित और वंचित वर्ग उनके साहित्य के केंद्र में रहे।read more:https://worldtrustednews.in/yogi-government-working-to-make-youth-skilled-in-line-with-industry-demand/ उनकी रचनाएं सत्य, न्याय, समानता और मानवीय संवेदना का संदेश देती हैं।अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. संतोष कुमार सिंह ने कहा कि प्रेमचन्द हिन्दी साहित्य के पहले ऐसे कालजयी साहित्यकारों में हैं, जिन्होंने कथा साहित्य को सामान्य जनजीवन के वास्तविक सरोकारों से जोड़ा। उनका साहित्य सामाजिक विसंगतियों को उजागर करने के साथ मानव मन की गहराइयों में प्रवेश करता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में भी प्रेमचन्द ने ‘हंस’ पत्रिका के माध्यम से समाज सुधार और जनजागरण का कार्य किया।उन्होंने कहा कि प्रेमचन्द का मानना था कि साहित्य समाज को दिशा देने वाली मशाल है, जो लोगों को सत्य, न्याय और समानता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।कवि गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। युवा कवि शशांक शेखर पाण्डेय ने प्रकृति सौंदर्य पर आधारित कविता प्रस्तुत कर वाहवाही बटोरी। अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने परहित और मानव सेवा पर आधारित रचना सुनाई। ओज के कवि दिनेश चन्द्र शर्मा ने अपनी रचना से श्रोताओं में ऊर्जा का संचार किया। वरिष्ठ गीतकार नागेश मिश्र ने युवाओं को सार्थक संदेश देने वाली रचना प्रस्तुत की। हण्टर गाजीपुरी ने हास्य व्यंग्य की रचनाओं से सभी को हंसाया। इसके अलावा कन्हैया लाल विचारक और संजय पाण्डेय ने भी काव्य पाठ किया।कार्यक्रम में संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी, मनोज विश्वकर्मा, प्रेम प्रकाश त्रिवेदी, प्रवीण कुमार तिवारी, यश त्रिपाठी, चार्विक त्रिपाठी सहित साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन संजीव त्रिपाठी ने किया।

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