सोनभद्र। जिला मुख्यालय के प्रमुख शहर सोनभद्र नगर में बुधवार को सत्ता के प्रभाव के आगे कानून बौना नजर आया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के प्रथम आगमन पर निकाली गई बाइक रैली में यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती रहीं, लेकिन मौके पर मौजूद यातायात पुलिस और सदर कोतवाली पुलिस मूकदर्शक बनी रही।read more:https://khabarentertainment.in/ghosiya-nagar-panchayats-entire-system-collapsed-during-just-five-minutes-of-rain/रैली में शामिल दर्जनों बाइक सवार बिना हेलमेट और एक बाइक पर तीन-तीन लोगों को बैठाकर शहर की सड़कों पर नारेबाजी करते हुए बेखौफ घूमते रहे। यह सब पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में होता रहा, मगर किसी ने ट्रैफिक नियमों के उलंघन में वाहन को रोकने या उसका चालान करने की जहमत तक नहीं उठाई। उल्टे पुलिसकर्मी रैली को निर्बाध आगे बढ़ाने में जुटे रहे। विडंबना यह है कि यही पुलिस आम दिनों में किसी मजदूर, किसान, छात्र या नौकरीपेशा व्यक्ति के बिना हेलमेट मिलते ही तत्काल ई-चालान काट देती है, लेकिन सत्ता से जुड़े लोगों की बारी आई तो कानून की सख्ती महज कागजों के पन्नों में सिमट कर रह गई। शहर में दिनभर इस दोहरे रवैये की चर्चा होती रही। लोगों का कहना था कि यदि यही नियम तोड़ने वाला कोई आम नागरिक होता तो पुलिस कार्रवाई में देर नहीं लगाती। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या यातायात नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं। क्या राजनीतिक रैलियों में कानून की कोई अहमियत नहीं रहती। स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से इस पर हस्तक्षेप की मांग किया है। उधर नगर में बगैर हेलमेट पहने बाइकों पर निकले भाजपा कार्यकर्ता, बाइक रैली के दौरान लगे जाम व बगैर परमिशन के लगाए गए बैनर-पोस्टर को लेकर राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार पांडेय ने कड़ी आपत्ति जतायी है। उन्होंने कहा कि भाजपाई सारे नियम कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। शहर में यदि कोई व्यक्ति किसी जरूरी कार्य से बगैर हेलमेट लगाए बाइक से निकलता है तो यातायात पुलिस उनकी बाइक का ई-चालान काट देती है, मगर वहीं भाजपाईयों द्वारा निकाली गई बाइक रैली में अधिकांश लोग बगैर हेलमेट पहने नजर आए, यातायात पुलिस कोई कार्रवाई नहीं की। नपा कर्मी का जवाब रहा चैंकाने लायक सोनभद्र। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के प्रथम जनपद आगमन पर नगर पालिका क्षेत्र में जगह-जगह लगाए गए बैनर और पोस्टर बुधवार देर शाम तक चर्चा का विषय बना रहा। जिन बैनर-पोस्टरों से पूरा शहर पाट दिया गया, क्या उनके लिए नगर पालिका से अनुमति ली गई थी, इसका जवाब नगर पालिका के जिम्मेदार कर्मचारी के पास भी नहीं रहा। जब इस संबंध में नगर पालिका के कर्मचारी संत सोनी से बुधवार को दोपहर बाद सेलफोन पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जनपद में आए हैं, तो क्या कोई परमिशन लेगा। उनका यह बयान खुद नगर पालिका की कार्यप्रणाली और नियमों पर सवाल खड़े कर रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या नियम-कानून सभी के लिए समान नहीं हैं, तो उन्होंने मामले पर नगर पालिका अध्यक्ष से बात करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। उधर बैनर-पोस्टर के सवाल पर उन्होंने कहा कि करीब एक वर्ष पूर्व नगर के स्वर्ण जयंती चैक पर भगवान परशुराम जयंती को लेकर बैनर लगाया गया था, नपा कर्मियों ने बगैर परमिट के बैनर लगाए जाने का हवाला देते हुए उसे उखड़वा कर फेंक दिया था। ऐसे में क्या भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के जनपद आगमन पर नगर में लगाए गए बैनर पोस्टर के लिए परमिशन जरूरी नहीं है। नपा कर्मी भाजपाईयों के इशारे पर कार्य कर रहे हैं।