जिसे मृत मानकर कर दी थीं अंतिम रस्में, 12 साल बाद अचानक घर लौटी मां

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शेरकोट । कहते हैं उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। बिजनौर के शेरकोट क्षेत्र में एक ऐसा ही चमत्कार देखने को मिला, जहां 12 साल पहले लापता हुई एक महिला, जिसे परिवार ने मृत मान लिया था और जिसकी अंतिम रस्में तक निभा दी गई थीं, अचानक अपने परिवार के बीच लौट आई। मां को सामने देखकर बेटों की आंखों से आंसू बह निकले और पूरा परिवार भावुक हो उठा।शेरकोट क्षेत्र के गांव शहजादपुर निवासी राजो देवी वर्ष 2014 में घर से निकल गई थीं। पारिवारिक कहासुनी और मानसिक अस्वस्थता के कारण वह अचानक लापता हो गईं। परिवार ने उन्हें खोजने के लिए हर संभव प्रयास किया। रिश्तेदारों से लेकर आसपास के जिलों तक तलाश की गई, पोस्टर लगवाए गए, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका।समय बीतता गया और इंतजार की डोर कमजोर पड़ती गई। आखिरकार परिवार ने यह मान लिया कि राजो देवी अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके नाम की अंतिम रस्में भी पूरी कर दी गईं। लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही लिख रखा था।
चार मई 2026 को हरियाणा के अंबाला जिले में पुलिस को एक बेसहारा महिला मिली।read more:https://pahaltoday.com/patients-machines-and-hackers-the-health-systems-new-crisis/ उसे यमुनानगर स्थित “नी आसरे दा आसरा” आश्रम भेजा गया। आश्रम में इलाज और देखभाल के दौरान महिला की हालत में सुधार हुआ। बातचीत के दौरान उसने अपना नाम राजो देवी और अपना घर बिजनौर के शेरकोट क्षेत्र में होना बताया।आश्रम की टीम ने तुरंत जानकारी जुटानी शुरू की और ग्राम प्रधान की मदद से शहजादपुर गांव में उनके परिवार तक पहुंच गई। वीडियो कॉल पर पहचान की पुष्टि होते ही परिवार की वर्षों पुरानी उम्मीद फिर से जाग उठी।जब राजो देवी के बेटे कपिल, सोनू और रोहित आश्रम पहुंचे और अपनी मां को सामने देखा, तो वे खुद को रोक नहीं सके। तीनों बेटे मां से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े। राजो देवी ने भी अपने बेटों को पहचान लिया। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।बेटे सोनू कुमार ने बताया कि मां के लापता होने के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया था। इसी दौरान उनके पिता रामदास वाल्मीकि का भी निधन हो गया। परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि मां इतने वर्षों बाद दोबारा मिल जाएंगी।आश्रम संचालक जसकीरत सिंह ने बताया कि सभी जरूरी सत्यापन प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद राजो देवी को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। 12 साल बाद मां और बेटों का यह मिलन पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे।

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