केरल को मिला नया नेतृत्व, वीडी सतीशन होंगे राज्य के अगले मुख्यमंत्री

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-कांग्रेस हाईकमान ने लंबे विचार-विमर्श के बाद लिया फैसला -यूडीएफ की जीत के प्रमुख रणनीतिकार रहे सतीशन

नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की शानदार जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया। कांग्रेस ने गुरुवार को वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन को केरल का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया।दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं मुकुल वासनिक, दीपा दास मुंशी और अजय माकन ने इस फैसले की औपचारिक घोषणा की। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में वीडी सतीशन और कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा था। करीब 10 दिनों तक चली चर्चा और सहयोगी दलों से विचार-विमर्श के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने सतीशन के नाम पर मुहर लगाई। बताया जा रहा है कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) सहित यूडीएफ के कई सहयोगी दलों ने भी सतीशन के पक्ष में खुलकर समर्थन दिया। वीडी सतीशन को 2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की वापसी का मुख्य चेहरा माना जा रहा है। उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाई। पिछले पांच वर्षों में विपक्ष के नेता के रूप में सतीशन ने विभिन्न जन मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर विधानसभा तक सरकार को घेरने में अहम भूमिका निभाई। कोच्चि के पास एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर में 31 मई 1964 को जन्मे वीडी सतीशन का परिवार लंबे समय से कांग्रेस विचारधारा से जुड़ा रहा है। उन्होंने कानून की पढ़ाई करने के बाद छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) और बाद में एनएसयूआई में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने संगठन में मजबूत पहचान बनाई। सतीशन पहली बार वर्ष 2001 में परूर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने लगातार छह बार जीत दर्ज कर अपनी मजबूत जनाधार वाली छवि कायम रखी। उनकी पहचान एक प्रखर वक्ता, जुझारू नेता और जमीनी राजनीति करने वाले चेहरे के रूप में रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्यम वर्ग, युवा मतदाताओं और सिविल सोसायटी में सतीशन की लोकप्रियता ने कांग्रेस को सत्ता में वापसी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब उनके सामने राज्य में नई सरकार को स्थिर और प्रभावी नेतृत्व देने की बड़ी चुनौती होगी।

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