सहारनपुर। वर्ष 2014 में गुरुद्वारे के निर्माण को लेकर हुए विवाद और उसके बाद फैली सांप्रदायिक हिंसा की कड़वी यादों को पीछे छोड़ते हुए सहारनपुर ने सोमवार को सामाजिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की नई मिसाल पेश की। जिस गुरुद्वारे के निर्माण को लेकर कभी तनाव का माहौल बना था, उसी गुरुद्वारे के निर्माण कार्य में मुस्लिम समाज के लोगों ने पहुंचकर कार सेवा की और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। करीब 12 वर्ष पुराने विवाद के समाधान के बाद पहली बार गुरुद्वारा निर्माण स्थल पर दोनों समुदायों के लोग एक साथ श्रमदान करते नजर आए। इस ऐतिहासिक पहल के पीछे वरिष्ठ सिख नेता सरदार गुरप्रीत सिंह बग्गा, श्री गुरुद्वारा सिंह सभा, जिला प्रशासन तथा मुस्लिम समाज के जिम्मेदार लोगों के वर्षों से किए जा रहे संवाद और विश्वास बहाली के प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद विवाद का समाधान निकला। इस दौरान सिख समाज ने मस्जिद निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग की पेशकश की थी, लेकिन मुस्लिम समाज ने भाईचारे को प्राथमिकता देते हुए वह राशि स्वीकार करने के बजाय गुरुद्वारा निर्माण के लिए समर्पित कर दी। इसके साथ ही विवाद से जुड़े मुकदमों का भी निस्तारण हो गया। समझौते के समय पार्षद मोहर्रम अली पप्पू ने संकल्प लिया था कि गुरुद्वारा निर्माण शुरू होने पर वह सबसे पहले कार सेवा करेंगे। सोमवार को उन्होंने अपने इस वचन को निभाते हुए पार्षद नूर आलम तथा मुस्लिम समाज के अन्य लोगों के साथ निर्माण स्थल पहुंचकर सिख समाज के साथ श्रमदान किया। दोनों समुदायों के लोगों ने मिलकर निर्माण कार्य में भागीदारी कर सामाजिक एकता और पारस्परिक विश्वास का प्रेरक संदेश दिया। कार सेवा के उपरांत श्री गुरुद्वारा सिंह सभा की ओर से पार्षद मोहर्रम अली श्पप्पूश्, पार्षद नूर आलम तथा कार सेवा में शामिल मुस्लिम समाज के अन्य लोगों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।read more:https://khabarentertainment.in/509-vidyut-sakhis-in-bijnor-receive-thermal-printers-instant-electricity-bill-receipts-will-now-be-available-at-doorsteps/इस अवसर पर सरदार गुरप्रीत सिंह बग्गा ने कहा कि वर्षों पुराने विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान सहारनपुर की साझा संस्कृति और आपसी विश्वास की जीत है। उन्होंने कहा कि संवाद, सहयोग और भाईचारे की भावना से हर बड़ा विवाद समाप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि गुरुद्वारे के लिंटर पर हुई यह कार सेवा केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि 12 वर्ष पुराने विवाद के अंत, सामाजिक समरसता और गंगा-जमुनी संस्कृति की नई पहचान है। दोनों समुदायों ने भविष्य में भी आपसी प्रेम, सद्भाव और सौहार्द बनाए रखने का संकल्प दोहराया।