भ्रष्टाचार पर ज्यूडिशियल काउंसिल का बड़ा बयान: “ईमानदार व्यवस्था के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा

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”नई दिल्ली। देश में बढ़ते भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं और सार्वजनिक संस्थाओं में घटते जनविश्वास को लेकर ज्यूडिशियल काउंसिल ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। परिषद ने स्पष्ट कहा कि जब तक शासन व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह नहीं बनेगी, तब तक “विकसित भारत” का सपना साकार नहीं हो सकता। परिषद ने भ्रष्टाचार को केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक न्याय पर सीधा हमला बताया।read more:https://pahaltoday.com/shastrarth-foundation-organised-a-feast-at-hotel-majestic/ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ा संकट आर्थिक असमानता से अधिक नैतिक पतन का है। उन्होंने कहा कि जब भ्रष्टाचार व्यवस्था का हिस्सा बन जाता है तो ईमानदार और प्रतिभाशाली लोग पीछे छूट जाते हैं, जबकि सिफारिश और धनबल व्यवस्था पर हावी हो जाते हैं। इसका सीधा असर आम जनता के विश्वास पर पड़ता है और लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होने लगती हैं।परिषद ने कहा कि देश में आज भी गरीबों को अपने वैध अधिकार पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है। किसानों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, युवाओं को रोजगार के लिए भ्रष्ट तंत्र का सामना करना पड़ता है और आम नागरिक वर्षों तक न्याय के लिए संघर्ष करता रहता है। ऐसी स्थिति में विकास के बड़े-बड़े दावे केवल नारों तक सीमित होकर रह जाते हैं।ज्यूडिशियल काउंसिल ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का अर्थ केवल बड़ी अर्थव्यवस्था, ऊंची इमारतें या डिजिटल तकनीक नहीं है। एक सच्चा विकसित राष्ट्र वही माना जाएगा जहां कानून सभी के लिए समान हो, सरकारी व्यवस्था पारदर्शी हो, प्रशासन जवाबदेह हो और हर नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिले। परिषद ने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार पर कठोर नियंत्रण नहीं किया गया तो विकास का लाभ केवल प्रभावशाली वर्ग तक सीमित रह जाएगा और समाज में असंतोष बढ़ेगा।चेयरमैन राजीव अग्निहोत्री ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि सभी सरकारी विभागों में डिजिटल पारदर्शिता लागू की जाए, भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह निष्पक्ष बनाया जाए और सार्वजनिक धन के उपयोग का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए ताकि जनता का विश्वास दोबारा मजबूत हो सके।परिषद ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन की भी मांग उठाई। साथ ही जांच एजेंसियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखने, व्हिसलब्लोअर्स को कानूनी सुरक्षा देने और गंभीर आरोप सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों को सार्वजनिक पदों से प्रतिबंधित करने की बात कही गई।युवाओं से विशेष अपील करते हुए परिषद ने कहा कि भारत का भविष्य केवल तकनीकी प्रगति से नहीं बल्कि नैतिक नेतृत्व और ईमानदार सोच से सुरक्षित होगा। युवाओं को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और सामाजिक जवाबदेही बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।ज्यूडिशियल काउंसिल ने मीडिया, अधिवक्ताओं, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों से भी भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर जनजागरण अभियान चलाने की अपील की। परिषद का कहना है कि जब तक समाज भ्रष्टाचार को सामान्य व्यवस्था मानता रहेगा, तब तक देश में वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं होगा।

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