भोपाल। देश की आधी आबादी आरक्षण का अपना पूरा हक मोदी सरकार से लेकर रहेगी। चाहे मोदी जी राह में कितने भी रोड़े क्यों ना अटका दें, किन्तु-परन्तु अगर-मगर की कितनी भी शर्तें क्यों ना लगा दें, जि़द है ये कांग्रेस पार्टी की कि हम महिलाओं को 33 आरक्षण दिलवा कर रहेंगे। यही नहीं दलित समाज से, आदिवासी समाज से, पिछड़े वर्ग से आयी अपनी बहनों को भी आरक्षण के अधिकार से वंचित नहीं होने देंगे। यह बात कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कायालय में पत्रकार वार्ता के दौरान कही। रागिनी ने कहा कि 17 अप्रैल 2026 का दिन ऐतिहासिक है। इस दिन देश को विभाजित करने के मोदी सरकार के खतरनाक मनसूबों पर विपक्ष की एकता ने पानी फेर दिया। ये संविधान और लोकतंत्र की जीत का दिन है, भारत की एकता और अखंडता की जीत का दिन है। और मैं स्पष्ट कर देना चाहती हूँ कि संसद में महिला आरक्षण का बिल नहीं गिरा है, नारी शक्ति वंदन अधिनियम तो 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो गया था, वो आज भी कानून है, बस मोदी जी उसे लागू नहीं होने दे रहे हैं। महिला आरक्षण के प्रति मोदी सरकार की गंभीरता इसी बात से समझ आ जाती है कि 3 साल पहले पारित बिल की अधिसूचना मोदी सरकार 16 अप्रैल 2026 को रात 9.55 पर जारी करती है तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव के बीच नींद से जाग कर विशेष सत्र बुलाती है। उन्हेंने कहा कि हम तो मांग कर रहे हैं कि 543 सीटों पर महिला आरक्षण आज ही हो जाए और हमारे पिछड़े वर्ग की बहनों को भी उसमें 1/3 जगह मिले। पर ऐसा परिसीमन जिससे दक्षिण के राज्यों की, उत्तर पूर्वी राज्यों की, छोटे राज्यों की हिस्सा चोरी हो, जिससे दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग की महिलाओं की हिस्सा चोरी हो वो हम नहीं होने देंगे। सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा कि जब भी ऐसा परिसीमन हो जिससे लोकसभा की सीटें बढ़े तो उसमें सभी प्रदेशों की हिस्सेदारी राजनैतिक निष्पक्षता से होनी चाहिए ना कि केवल अंक-गणित के हिसाब से । मोदी जी कहते हैं कि विपक्ष की नियत में खोट है।read more:https://pahaltoday.com/sukesh-chandrashekhar-granted-bail-in-rs-200-crore-money-laundering-case/
e संविधान का 73वें और 74वें संशोधन कर के राजीव गांधी की सरकार पंचायत और लोकल बॉडीज के चुनाव में महिलाओं के लिए 33 आरक्षण ले कर आयी जिसके चलते आज निगम में और पंचायतों में 15 लाख से ज्यादा चुनी हुई महिलाएँ हैं। 1989 में जब राजीव गांधी से बिल ले कर आए तो 4 बड़े भाजपायी नेताओं ने विरोध में वोट किया – अटल बिहारी वाजपायी, लालकृष्ण आडवानी, जसवन्त सिंह और राम जेठमलानी। संघी-भाजपायी कल भी महिला विरोधी थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे। सोनिया गंधी, मनमोहन सिंह के नेतृत्व में पीए 2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल लायी और उसे पारित करवाया। लोकसभा में हमारे पास संख्या बल नहीं था इसलिए हम बिल पास नहीं करवा पाए लेकिन 10 साल पुर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार की क्या मजबूरी थी कि महिला आरक्षण लागू नहीं करवा पाए? उन्हेंने कहा कि महिला समता, समानता, सशक्तिकरण और सम्मान को ले कर अगर किसी की नीति और नियत में खोट है तो वो सिर्फ और सिर्फ मोदी सरकार है अगर मोदी जी की नियत साफ होती तो जब 2018 में जब राहुल गांधी ने मोदी जी को चिट्ठी लिख कर 2019 से महिला आरक्षण लागू करने की मांग की थी और पूरण समर्थन का वादा किया था, तो मोदी जी 2019 से महिला आरक्षण लागू करवाते ! अगर मोदी जी की नियत साफ होती तो 2023 में सर्व-सम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियमÓ को जनगणनाÓ और परिसीमन की बैसाखियों पर 2034 तक नहीं लटकाते ! अगर मोदी जी की नियत साफ होती तो महिला आरक्षण की आज़ में परिसीमन को हथियार बना कर अपने सियासी $फायदे के लिए देश की एकता और