किसान नेता ने उद्योगपति से मांगा 5 लाख महीना ‘गुंडा टैक्स’

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बाराबंकी। जिले में एक उद्योगपति द्वारा अवैध वसूली और धमकी के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। लखनऊ के गोमती नगर विस्तार निवासी उद्योगपति हेम करन माथुर ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी कंपनी को निशाना बनाकर सुनियोजित तरीके से दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनियां फिश गोल्ड इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और एमएलएल एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड बायो एवं ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र और एनिमल फीड के निर्माण में कार्यरत हैं और सभी वैधानिक मानकों का पालन करती हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि किसान यूनियन से जुड़े कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर हर महीने 5 लाख रूपए की अवैध वसूली (गुंडा टैक्स) की मांग की जा रही है। उद्योगपति का कहना है कि आरोपित लोग कंपनी के वाहनों को रोककर ड्राइवरों से अभद्रता करते हैं और संदेश देते हैं कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो फैक्ट्री का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित तौर पर कुछ लोग गांव में किसानों को भड़काकर कंपनी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। शिकायत के अनुसार, कर्मचारियों के साथ मारपीट और फैक्ट्री में तोड़फोड़ की आशंका भी जताई गई है, जिससे कंपनी का संचालन प्रभावित हो सकता है। शिकायत में कहा गया है कि मुख्य आरोपी ने कथित तौर पर किसान यूनियन के नाम पर एक संगठन बनाकर उसकी आड़ में गुंडागर्दी और वसूली का नेटवर्क तैयार किया है। आरोप है कि यह समूह किसानों की सुरक्षा के नाम पर व्यापारियों को निशाना बनाकर दबाव बनाता है और अवैध वसूली करता है। उद्योगपति ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी लोग सरकारी विभागों में झूठी शिकायतें देकर अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं। यदि कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती तो आंदोलन और उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की धमकी दी जाती है, जिससे प्रशासनिक तंत्र पर भी अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।read more:https://pahaltoday.com/census-training-completed-in-mahroni-city-practice-done-in-the-field/पीड़ित का कहना है कि उनकी कंपनी सभी सरकारी मानकों और लाइसेंस के तहत काम कर रही है। समय-समय पर उत्पादों की जांच भी होती है और सभी सैंपल मानकों पर खरे उतरते हैं। इसके बावजूद उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उद्योगपति ने अपनी शिकायत में कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए बेहतर माहौल देने का दावा किया जाता है, लेकिन इस तरह की घटनाएं उस छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे एक महीने के भीतर अपने सभी लाइसेंस सरेंडर करने को मजबूर होंगे। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। कंपनी और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अवैध वसूली और धमकी देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जहांगीराबाद थाने में नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5), 308(5), 56, 351(2), 352, 217 और 126(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को दी गई तहरीर के आधार पर जिन लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें भाकियू नेता विनोद कुमार वर्मा, आजाद वर्मा, कमल कुमार वर्मा, शिवराज रावत, बसंत लाल वर्मा, उस्मान अली, शुभम वर्मा, विपिन वर्मा, सोनू पुत्र कन्हैयालाल शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन सभी को मामले में नामजद आरोपी बनाया गया है और उनके खिलाफ जांच की जा रही है।

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