भक्ति को जीवन का आधार: आचार्य सरस महाराज

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गंगोह। श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक ने कहा कि मानव को अपने भक्ति भाव से आत्मा के परमात्मा से मिलन का प्रयास करना चाहिए। उन्होने भक्ति को जीवन का आधार बताया। सराय पट्टी स्थित रामलीला भवन में संस्था श्री महाकालेश्वर युवा कमेटी द्वारा श्रीमद् भागवत सप्ताह के बूंदाबांदी के बीच में कथा वाचक आचार्य सरस महाराज ने कहा कि भजन व भक्ति ही मानव जीवन का आधार है। प्रभु के सिमरन के लिए ही हमें यह मानव जीवन मिला है लेकिन लोभ और मोह के वशीभूत होकर हम यह सब भूल जाते हें।read more:https://khabarentertainment.in/call-to-embrace-dr-syama-prasad-mookerjees-ideas-bjp-organizes-an-ideological-seminar/इसी कारण हम बार बार जीवन मरण के चक्र में फंस कर रह जाते हैं। इसी कारण से हम दुखों को प्राप्त करते है। कथा वाचक ने कहा कि जब हमें यह मानव योनि प्राप्त हुई है तो हमें उस परमात्मा से अपनी आत्मा के मिलन का प्रयास भी करना चाहिए। भगवान की भक्ति में लीन होकर ही मनुष्य जन्म मरण के झंझट से मुक्त हो सकता है। उन्होने परिक्षित की कथा का वर्णन किया। उन्होने कलयुग के आरंभ होने की कथा भी सुनाई। कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा के दौरान धार्मिक गीतों पर श्रद्धालु जम कर झूमें। कथा आरंभ होने से पूर्व कथा व्यास का स्वागत कर तथा माला पहनाकर व्यास गद्दी पर बैठाया। कथा में सैंकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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