प्राथमिक शिक्षक चयन प्रक्रिया में बदलाव न्यायसंगत: पं.राधेश्याम शर्मा

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धामपुर (बिजनौर)। प्राथमिक विद्यालयों में पहली बार उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग शिक्षक भर्तियां कराएगा, जिसमें एकेडमिक मेरिट की व्यवस्था को समाप्त कर केवल लिखित परीक्षा के आधार पर चयन का प्रावधान किया गया है। उ.प्र. राज्य शिक्षक   पं.राधेश्याम शर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस निर्णय को न्यायसंगत बताया है । उन्होंने बताया कि आज से 10-11 वर्ष पूर्व अकादमिक अंक वर्तमान के अंकों की तुलना में काफी कम हुआ करते थे।  पहले 75 प्रतिशत प्राप्तांक वाला परीक्षार्थी टाॅप मेरिट में आ जाता था ,अब तो शिक्षार्थी शत-प्रतिशत अंक प्राप्त कर रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/ इसी के साथ तकनीकी शिक्षा और सामन्य विषयों में स्नातक और परास्नातक परीक्षा में दिये जाने वाले अंकों में काफी अंतर देखने को मिल रहा है । प्राइवेट विश्वविद्यालयों  एवं केन्द्रीय अथवा राज्य शासित विश्वविद्यालयों में परीक्षार्थियों को दिये जाने वाले अंक प्रतिशत में भी अंतर देखा गया है। इसी भिन्नता के कारण 7-8 वर्ष पूर्व डीएलएड कर चुके अभ्यर्थी अकादमिक मेरिट में पिछड़ जाते थे और चयन प्रक्रिया से वंचित रह जाते थे। एकेडमिक मेरिट व्यवस्था को समाप्त कर केवल लिखित परीक्षा के आधार पर चयन का प्रावधान न्यायसंगत एवं अभ्यर्थियों के हित में है । इसके अतिरिक्त कई वर्ष पूर्व डीएलएड एवं टीईटी कर चुके अभ्यर्थियों को वर्षवार भरांक दिये जाने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार एवं शिक्षा सेवा चयन आयोग को विचार करना चाहिए।

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