नई दिल्ली। भारतीय सेना की ड्रोन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक उपलब्धि हासिल हुई है। सोलर इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित स्वदेशी भार्गवास्त्र काउंटर-ड्रोन सिस्टम अब अपने अंतिम परीक्षण में है। पूरे परीक्षण दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह सिस्टम दुश्मन के ड्रोन, लॉइटरिंग मुनिशन और खासकर स्वार्म अटैक को खत्म करने के लिए बनाई गई है। भार्गवास्त्र एक लेयर्ड हार्ड-किल इंटरसेप्शन आर्किटेक्चर पर काम करता है। इसमें एक सिंगल लॉन्चर में 64 माइक्रो-रॉकेट्स या मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। इसमें सभी हथियार एक साथ सिर्फ 10 सेकंड में दागे जा सकते हैं। यह क्षमता इसे ड्रोन स्वार्म हमलों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाती है। सिस्टम मध्यम और बड़े यूएवी को 10 किलोमीटर दूर से और छोटे ड्रोन को 6 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर डिटेक्ट कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भार्गवास्त्र में दो प्रकार के हथियार लगे हैं। स्वार्म हमलों को रोकने के लिए अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो बड़े क्षेत्र को कवर करता है। वहीं सटीक हमले के लिए गाइडेड माइक्रो-मिसाइल्स का इस्तेमाल होता है, जो लक्ष्य को सीधे मार गिराती हैं।read more:https://pahaltoday.com/warning-of-indefinite-strike-from-may-26/ यह हिट-टू-किल तकनीक पर काम करता है। भार्गवास्त्र को भारत की अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और 5000 मीटर तक की ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में भी ढंग से काम करता है। यह क्षमता इसे सीमा सुरक्षा, महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थानों की सुरक्षा के लिए बेस्ट बनाती है। यह सिस्टम भारत को स्वदेशी एंटी-ड्रोन शील्ड विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पूरी तरह भारतीय कंपनियों द्वारा विकसित भार्गवास्त्र न सिर्फ सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाएगा बल्कि विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम करेगा। अंतिम परीक्षण सफल होने के बाद भारतीय सेना में इसका शीघ्र शामिल होना भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देगा। ड्रोन युद्ध के इस नए युग में भार्गवास्त्र जैसे स्वदेशी हथियार भारत को मजबूत सुरक्षा कवच देगा।