पहल टुडे हरिकृष्ण कश्यप कानपुर देहात। “बैंड केवल पहचान नहीं, न्याय के प्रति दायित्व का संकल्प है।” यह बात जिला बार एसोसिएशन, कानपुर देहात के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने नवप्रवेशित युवा महिला अधिवक्ता गायत्री विश्वकर्मा का बैंड बाँधकर एवं मिष्ठान खिलाकर अधिवक्ता परिवार में स्वागत करते हुए कही।और प्रथम सीख देते कहा कि,अधिवक्ता का पहला धर्म अपने वादकारी के विश्वास और न्यायालय की गरिमा को बनाए रखना है।उन्होंने कहा कि विधि व्यवसाय केवल रोजी-रोटी का माध्यम नहीं, बल्कि न्याय, संविधान और वादकारी के अधिकारों के प्रति जिम्मेदारी का क्षेत्र है। युवा अधिवक्ताओं को प्रारंभिक कठिनाइयों से निराश होने के बजाय निरंतर अध्ययन, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुभव और अपने परिश्रम को आधार बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।उन्होंने कहा कि,अधिवक्ता को कानून का ज्ञाता होने के साथ-साथ समाज के प्रति अपने दायित्व को समझने वाला जागरूक नागरिक भी होना चाहिए।जितेंद्र चौहान ने कहा कि विधि के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी स्वागत योग्य है।read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/ महिला अधिवक्ताएँ अपनी प्रतिभा, ज्ञान और मेहनत के माध्यम से न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं का उत्साह और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी बार को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है।पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह ने कहा कि अधिवक्ता की वास्तविक पहचान उसके ज्ञान, आचरण और न्याय के प्रति निष्ठा से बनती है। उन्होंने गायत्री विश्वकर्मा को निरंतर अध्ययन और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएँ दीं।पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सम्पात लाल ने कहा कि नई पीढ़ी के अधिवक्ता ही बार का भविष्य हैं। वरिष्ठों के अनुभव से सीखते हुए युवा अधिवक्ता अपनी मेहनत और प्रतिभा से मजबूत पहचान बनाएं। श्री यादव ने गायत्री विश्वकर्मा के उज्ज्वल विधिक भविष्य की कामना की।इस अवसर पर उपाध्यक्ष सुभाष चन्द्र यादव, योगेन्द्र प्रताप सिंह चौहान, कंचन यादव, रोहित शुक्ला राजा सिंह, सद्दाम, महेन्द्र सिंह, वैभवकांत मिश्रा, आनन्द स्वरूप शुक्ला, मनमोहन सिंह, प्रदीप कमल, हरदीप सिंह सहित अन्य अधिवक्ता प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।