डाला, सोनभद्र। रिहंद जलाशय में निर्धारित मत्स्य आखेट बंदी अवधि के दौरान कथित रूप से बड़े पैमाने पर मछली पकड़े जाने का मामला सामने आया है। निषाद पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, मत्स्य विभाग उत्तर प्रदेश शासन को शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रिहंद जलाशय में एक जुलाई से 31 अगस्त तक मत्स्य आखेट बंदी निर्धारित होने के बावजूद संबंधित ठेकेदारों द्वारा कथित रूप से अवैध रूप से मछली का आखेट किया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 15 अगस्त से बड़े पैमाने पर मत्स्य आखेट किए जाने की सूचना मिली, जबकि इस अवधि में किसी वैध अनुमति अथवा विशेष आदेश की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। अनिकेत निषाद ने कहा कि यदि बंदी अवधि में किसी विशेष अनुमति या छूट के आधार पर मत्स्य आखेट कराया गया तो उसके आदेश, वैधानिक आधार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/उनका आरोप है कि नियमों के विपरीत आखेट की अनुमति दिए जाने से शासन को राजस्व की क्षति भी हो सकती है। शिकायतकर्ता के अनुसार मामले में पूर्व में निदेशक, मत्स्य विभाग लखनऊ सेे भी शिकायत की गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर अब मामला अपर मुख्य सचिव के समक्ष उठाया गया है।
राजस्व क्षति के आकलन की मांग
निषाद पार्टी जिलाध्यक्ष ने बंदी अवधि में हुए कथित मत्स्य आखेट की स्वतंत्र जांच कर वास्तविक मात्रा, संबंधित ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग की है। साथ ही राजस्व क्षति पाए जाने पर संबंधित लोगों से नियमानुसार वसूली कराने और जांच पूरी होने तक नियम विरुद्ध मत्स्य आखेट पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की गई है।