गाजीपुर। धनतेरस के पावन पर्व पर शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को बैजनाथ इंटर कॉलेज, रौजा गाजीपुर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने रामायण के प्रमुख प्रसंगों पर आधारित लघु नाट्य का भावपूर्ण मंचन कर भगवान श्रीराम के आदर्शों, हनुमान जी की अटूट भक्ति और माता सीता के धैर्य एवं त्याग का संदेश दिया। विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति से विद्यालय परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा।कार्यक्रम में रामायण के उन महत्वपूर्ण प्रसंगों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया, जो मर्यादा, साहस, कर्तव्यनिष्ठा, विश्वास और समर्पण की प्रेरणा देते हैं। लघु नाट्य की शुरुआत समुद्र पर रामसेतु निर्माण के प्रसंग से हुई। इसमें दिखाया गया कि किस प्रकार भगवान श्रीराम ने माता सीता को रावण की कैद से मुक्त कराने के उद्देश्य से लंका पहुंचने के लिए समुद्र पर सेतु निर्माण का संकल्प लिया। वानर सेना के सहयोग और सामूहिक प्रयास से रामसेतु का निर्माण किया गया। विद्यार्थियों ने इस प्रसंग को मंच पर आकर्षक ढंग से प्रस्तुत कर एकता, संगठन और दृढ़ इच्छाशक्ति की महत्ता को दर्शाया।इसके बाद नाट्य मंचन में हनुमान जी के लंका पहुंचने और अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट करने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। हनुमान जी ने भगवान श्रीराम के दूत के रूप में अशोक वाटिका में प्रवेश कर माता सीता को खोजा।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/माता सीता के समक्ष पहुंचकर उन्होंने विनम्रतापूर्वक अपना परिचय देते हुए कहा कि वे प्रभु श्रीराम के दूत हनुमान हैं। इसके बाद माता सीता ने हनुमान जी का प्रणाम स्वीकार किया। हनुमान जी ने माता सीता को भगवान श्रीराम का संदेश सुनाते हुए उनके शीघ्र लंका पहुंचने और उन्हें रावण के बंधन से मुक्त कराने का भरोसा दिलाया।इस दृश्य का मंचन विशेष रूप से भावुक और प्रभावशाली रहा। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से माता सीता की पीड़ा, प्रतीक्षा और श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास को अभिव्यक्त किया। वहीं हनुमान जी के चरित्र में भक्ति, विनम्रता, साहस और सेवाभाव का सुंदर चित्रण किया गया। मंचन के दौरान विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति में शक्ति होती है और दृढ़ संकल्प के साथ कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है।कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और रामायण में निहित जीवन मूल्यों से परिचित कराना रहा। रामायण के प्रसंगों के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, सत्य, न्याय और कर्तव्यपालन की प्रेरणा देता है, जबकि हनुमान जी का चरित्र निस्वार्थ सेवा, समर्पण, साहस और अटूट विश्वास का प्रतीक है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के भीतर अपनी सभ्यता, संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इस अवसर पर विद्यालय की प्रबंधिका श्रीमती आशा मिश्रा, प्रधानाचार्य, समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति को सराहा। कार्यक्रम ने न केवल धनतेरस के पर्व को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रंग प्रदान किया, बल्कि विद्यार्थियों को रामायण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा भी दी।