सोनभद्र। स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अनुपस्थित कर्मचारियों का वेतन रोकने और उनसे स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। साथ ही कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने, मातृ एवं शिशु मृत्यु का अनिवार्य ऑडिट कराने तथा गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।read more:https://pahaltoday.com/18-schoolgirls-suddenly-fainted-due-to-the-scorching-heat/बैठक में जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव के सापेक्ष कम से कम 90 प्रतिशत पात्र लाभार्थियों का भुगतान अगली बैठक से पहले सुनिश्चित करने को कहा गया। प्रसव पूर्व जांच के लिए पंजीकरण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर चतरा, चोपन, दुद्धी और घोरावल के संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी गई। इन क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 90 प्रतिशत से अधिक पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पोषण पुनर्वास केंद्र में अति कुपोषित बच्चों की कम भर्ती पर सीडीओ ने नाराजगी जताई। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की प्रत्येक टीम को प्रति सप्ताह कम से कम एक अति कुपोषित बच्चे को भर्ती कराने का लक्ष्य दिया गया। आगामी माह में किसी टीम द्वारा एक भी बच्चे को भर्ती नहीं कराने पर संबंधित टीम का मानदेय रोकने और वाहन को जिला मुख्यालय से संबद्ध करने की चेतावनी दी गई। सीडीओ ने जनपद में होने वाली प्रत्येक मातृ एवं शिशु मृत्यु का अनिवार्य ऑडिट कराकर रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मृत्यु के आंकड़े छिपाने या सूचना देने में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए सभी ब्लॉकों में कॉल सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए गए। इनके माध्यम से गर्भावस्था के सातवें, आठवें और नौवें महीने में महिलाओं को फोन कर पोषण, प्रसव पूर्व जांच और संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूक किया जाएगा। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं से नियमित संपर्क कर उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत महिला एवं पुरुष नसबंदी शिविर आयोजित करने, अस्थायी गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग को बढ़ावा देने और पांच नवंबर तक पल्स पोलियो अभियान की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। क्षय रोग उन्मूलन अभियान के तहत अधिकारियों को कम से कम एक-एक टीबी मरीज को गोद लेकर पोषण पोटली वितरित करने तथा स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की आभा आईडी बनवाने को कहा गया।