शक्तिनगर, सोनभद्र। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) के अध्यक्ष जिष्णु बरुआ और सचिव हरप्रीत सिंह प्रूथी ने एनटीपीसी सिंगरौली का दौरा कर विद्युत उत्पादन, तकनीकी उत्कृष्टता, सुरक्षा व्यवस्था, स्टेज-3 परियोजना, पर्यावरण संरक्षण और सीएसआर गतिविधियों का जायजा लिया। परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक ई. प्रभाकर राव के नेतृत्व में अधिकारियों ने अतिथियों को परियोजना की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।शक्तिनगर आवासीय परिसर स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम पहुंचने पर दोनों अधिकारियों का एनटीपीसी प्रबंधन और सीआईएसएफ की ओर से स्वागत किया गया। इस दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सीएसआर के तहत आयोजित कार्यक्रम में गर्ल्स एम्पावरमेंट मिशन (जीईएम) की बालिकाओं को स्कूल बैग व स्टेशनरी किट वितरित किए गए। परियोजना प्रभावित और आसपास के क्षेत्रों की जरूरतमंद बालिकाओं को साइकिलें भी दी गईं। अतिथियों ने बालिकाओं से संवाद कर उनकी शिक्षा और भविष्य की आकांक्षाओं की जानकारी ली।read more:https://pahaltoday.com/mobile-court-visits-ballia-to-hear-grievances-of-persons-with-disabilities-state-commissioner-issues-strict-directives/ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सीईआरसी अध्यक्ष और सचिव ने पौधरोपण किया। इसके साथ ही स्टेडियम परिसर में आधुनिक जिम का उद्घाटन किया। बाद में उन्होंने संयंत्र के सुरक्षा नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। स्टेज-3 परियोजना क्षेत्र का भ्रमण कर निर्माण कार्यों और परियोजना की प्रगति का जायजा लिया। यूनिट-06 के नियंत्रण कक्ष में विद्युत उत्पादन, निगरानी प्रणाली और आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। प्रशासनिक भवन के संकल्प सम्मेलन कक्ष में आयोजित प्रस्तुतीकरण में ई. प्रभाकर राव ने एनटीपीसी सिंगरौली के विद्युत उत्पादन, प्रचालन प्रदर्शन, स्टेज-3 परियोजना, सुरक्षा प्रबंधन, पर्यावरणीय पहल और सीएसआर गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और विश्वसनीय विद्युत उत्पादन के साथ तकनीकी उत्कृष्टता व सतत विकास एनटीपीसी की प्राथमिकता है। सीईआरसी अध्यक्ष जिष्णु बरुआ ने कहा कि बदलते ऊर्जा परिदृश्य में विश्वसनीयता, दक्षता, सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने देश की ऊर्जा सुरक्षा में एनटीपीसी की भूमिका की सराहना की। इस दौरान विद्युत क्षेत्र के नियामकीय एवं प्रचालन संबंधी विषयों, उत्पादन दक्षता, परियोजना विकास, सुरक्षा, पर्यावरणीय अनुपालन और ऊर्जा क्षेत्र की भावी चुनौतियों पर अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श हुआ।