जिज्ञासा डीयू द्वारा ‘जंतर मंतर एवं जेन जी’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन: सामाजिक और राजनीतिक विमर्श पर वरिष्ठ विचारकों के गहन विचार

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‘जिज्ञासा डीयू’ द्वारा आज एकात्म भवन, नई दिल्ली में ‘जंतर मंतर एवं जेन जी’ विषय पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस बौद्धिक सत्र में देश के प्रख्यात पत्रकार श्री हर्षवर्धन त्रिपाठी, प्रतिष्ठित शिक्षाविद प्रोफेसर अवनिजेश अवस्थी और श्यामा प्रसाद मुखर्जी फाउंडेशन के निदेशक श्री विनय कुमार सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों से 70 से अधिक प्राध्यापकों ने सक्रिय रूप से भाग लेकर विषय की गंभीरता पर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम की रूपरेखा रखते हुए ‘जिज्ञासा’ के संस्थापक श्री राजकुमार भाटिया ने कहा कि यह मंच लगातार राष्ट्रीय और सामाजिक महत्व के ज्वलंत विषयों पर सार्थक संवाद को मंच प्रदान करता है, ताकि समाज को एक सकारात्मक दिशा मिल सके।विषय के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए प्रमुख वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। प्रो. अवनिजेश अवस्थी ने हाल ही में जंतर मंतर पर हुए तथाकथित छात्र आंदोलन में प्रयुक्त अमर्यादित भाषा और आपत्तिजनक टिप्पणियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सभ्य समाज इस प्रकार की प्रवृत्तियों को कभी स्वीकार नहीं कर सकता, क्योंकि केवल सोशल मीडिया पर ट्रेंड पाने के लिए गालियों और भद्दे नारों का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/वहीं, वरिष्ठ पत्रकार श्री हर्षवर्धन त्रिपाठी ने इस संपूर्ण घटनाक्रम का विश्लेषण करते हुए बताया कि इसे पांच अलग-अलग परतों में समझने की आवश्यकता है क्योंकि शुरुआत में इस आंदोलन से छात्रों के वास्तविक और जायज हित जुड़े थे, लेकिन बाद में कुछ राजनीतिक षड्यंत्रकारियों ने उनके भोलेपन का अनुचित लाभ उठाकर अपने निजी राजनीतिक हितों को साधने का प्रयास किया।इसके अतिरिक्त, श्यामा प्रसाद मुखर्जी फाउंडेशन के निदेशक श्री विनय कुमार सिंह ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि इस प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के वे लोग सक्रिय थे जो पूर्व में आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे थे और वैचारिक मतभेद न होने के बावजूद इस प्रकार का हिंसक प्रदर्शन और सुनियोजित अराजकता स्पष्ट करती है कि इसके पीछे दिल्ली में सत्ता परिवर्तन का एक बड़ा, किंतु विफल राजनीतिक षड्यंत्र था।कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रो. राकेश पांडे ने किया, जबकि अंत में डॉ. महेश कौशिक ने सभी गणमान्य अतिथियों और उपस्थित शिक्षक समाज का आभार व्यक्त करते हुए सत्र का समापन किया।

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