भदोही। संपूर्ण भारतवर्ष जहां स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रभक्ति, गौरव और उल्लास के साथ मना रहा था, वहीं संत निरंकारी मिशन ने इस ऐतिहासिक अवसर पर ब्रह्मज्ञान द्वारा प्रदत्त आंतरिक स्वतंत्रता के दिव्य संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाया। यह पर्व इस सत्य को साकार करता है कि वास्तविक मुक्ति बाहरी बंधनों से नहीं, बल्कि अज्ञान, अहंकार और भेदभाव से मुक्त होकर आत्मबोध एवं परमात्मबोध की अनुभूति में निहित है। मुक्ति पर्व का यह पावन अवसर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन आशीर्वाद से भदोही स्थित सभी निरंकारी सत्संग भवन में दोपहर 12 बजे से 2:30 बजे तक श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मोहन लाल जी ने फरमाया कि सच्ची मुक्ति बाहरी बंधनों से नहीं, बल्कि नफरत, अहंकार, छोटी सोच और पूर्वाग्रहों से मुक्त होने में है। हर सांस में निराकार का एहसास रखते हुए प्रेम, भक्ति और स्वीकार्यता से जीना ही जीते-जी मुक्ति है। उन्होंने माता सविंदर जी के जीवन से प्रेरणा देते हुए लाइट हाउस का उदाहरण दिया कि परिस्थितियां कैसी भी हों, भीतर की शांति, प्रेम और सकारात्मकता की रोशनी सदैव कायम रखें। संतों की शिक्षाओं को केवल सुनना नहीं, बल्कि विचार, कर्म और जीवन में उतारना ही वास्तविक साधना और मुक्ति का मार्ग है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु भक्तों ने उन महान संत विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए श्रद्धा-सुमन अर्पित किए, जिनके त्याग एवं समर्पण ने मानवता को मुक्तिमार्ग की ओर अग्रसर किया। साथ ही विश्वभर में मिशन की विभिन्न शाखाओं में भी ‘मुक्ति पर्व’ के अवसर पर विशेष सत्संग का आयोजन कर इन महान संत विभूतियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।