चन्दौसी। महापुरुष स्मारक समिति एवं सर्व समाज जागरूकता अभियान भारत के संयुक्त तत्वावधान में 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम की वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी, भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई व स्वामी विवेकानंद जी के गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस की पुण्य तिथि सीता रोड स्थित नीलम हॉस्पिटल में धूमधाम व समारोह पूर्वक मनाई।रविवार को आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम मुख्य अतिथि/मुख्य वक्ता अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि माधव मिश्र ने तीनों महापुरुषों के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।अध्यक्षता डॉ. नितिन कौशिक व संचालन डॉ. अरविन्द कुमार गुप्ता ने किया। विशिष्ट अतिथि महेश कुमार गुप्ता, डॉ. निशा गुप्ता, पंकज अग्रवाल, अंकित वार्ष्णेय, आशीष कुमार कश्यप, हिमांशु यादव, विकास यादव, अश्विनी शर्मा, शोभा यादव रहीं। व्यवस्थापक शिव कुमार, दीपक सैनी, नदीम, विशाल रहे। कार्यक्रम आयोजक पण्डित सुरेश चन्द्र शर्मा रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कवि माधव मिश्र ने कहा कि भारत की भूमि पर अनेक वीर एवं वीरांगनाओं का जन्म हुआ है। 1857के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई है, इन्हीं में से वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का नाम भी शामिल है। स्वतंत्रता सेनानी एवं प्रथम शहीद वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का जन्म 16अगस्त 1831 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के मनकेडी गांव में हुआ था। उनके पिता राव जुझार सिंह जमीदार थे। उनकी शिक्षा घर पर हुई आपने तलवार चलानी भी सीखी। अबंती बाई का विवाह रामगढ़ के राजा लक्ष्मण सिंह लोधी के पुत्र विक्रमादित्य लोधी से हुआ। 1850 में लक्ष्मण सिंह के निधन पर विक्रमादित्य राजा बने और अवंती बाई लोधी रानी। लेकिन कुछ दिनों के बाद राजा विक्रमादित्य बीमार हो गए तब रानी अवंती बाई लोधी ही राजकाज संभालती थीं। इक दिन राजा विक्रमादित्य का निधन हो गया अब सारी जिम्मेदारी रानी अवंती बाई लोधी ने संभाली । उस समय ब्रिटिश शासन था। अंग्रेजो ने राज्य हड़प नीति के तहत राज्य का खजाना जब्त करने के लिए प्रतिनिधि भेजे। रानी अवंती बाई लोधी ने उन्हें खदेड़ दिया। रानी अवंती बाई लोधी ने बाद में रामगढ़ की रक्षा करते हुए अंग्रेजो की विशाल सेना से युद्ध लड़ा। 20मार्च 1858ई को रानी अवंती बाई लोधी अंग्रेजो से युद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुई। आगे कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को हुआ था।read more:https://pahaltoday.com/district-magistrate-holds-meeting-of-the-district-drinking-water-and-sanitation-mission-issues-directives/ पिता कृष्ण बिहारी वाजपेई जी अध्यापक होने के साथ सिद्धहस्त कवि थे, साथ ही मां कृष्णा देवी धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। अटल जी ने डी ए बी कॉलेज कानपुर से राजनीत शास्त्र में एम ए किया। इसी दौरान वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े और 1942 में प्रचारक बन गए। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। यह उनका व्यक्तिगत निर्णय था, जिसमें वह तीस दिन जेल में रहे। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के साथ भारतीय जनसंघ की 1951 में स्थापना की। 1957मे बलराम पुर से सांसद बने। वह 1968 से 1972 तक भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 1975 की इमर्जेंसी में गिरफ्तार हुए। 1977में वह जनता पार्टी द्वारा विदेश मंत्री बने। वहीं 1980 में अटल जी ने भारतीय जनता पार्टी बनाई। वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। अटल बिहारी वाजपेई जी कवि, पत्रकार, प्रखर वक्ता, कुशल राजनीतिज्ञ थे। अटल जी ने लम्बे समय तक राष्ट्र धर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि पत्र पत्रिकाओं का संपादन किया। 1999 से 2004 तक एनडीए के द्वारा वह तीसरी बार पूर्णकालिक प्रधानमंत्री बनें। अटल जी ने अपने कार्यकाल में अमेरिका के दबाव के बाद भी 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण करते हुए विश्व को चौंकाते हुए भारत को परमाणु शक्तिशाली देश बनाया। 1999 में कारगिल युद्ध में विजय हासिल की। सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत कर कई योजनाएं देश में लागू की। अटल जी ने 2005 मे सक्रिय राजनीत से सन्यास ले लिया। अटल जी को 2015 मे भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व पद्म विभूषण, श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार, सहित कई सम्मान प्रदान किए गए। आगे कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के कामारपुकुर गांव में हुआ। उनके पिता खुदीराम चट्टोपाध्याय व मां चंद्रमणि देवी को विष्णु भगवान ने सपने में कहा कि मैं जन्म लेने आ रहा हूं। इसलिए इनका नाम गदाधर रखा गया। जब सात साल के थे पिता का निधन हो गया। बड़े भाई रामकुमार के साथ कोलकाता के दक्षणेश्वर मन्दिर में देवी को सजाने का काम करते। एक साल बाद बड़े भाई रामकुमार के निधन के बाद इन्हें मुख्य पुजारी बनाया गया। यह देवी मां की सेवा में मगन रहने लगे। मां ने सोचा बेटा सन्यासी बनने की ओर है तो शारदा देवी से विवाह कर दिया। एक बार नरेन्द्र नामक बालक आया उसने परमहंस से पूंछा आपने ईश्वर देखा है इन्होंने कहा बिल्कुल ऐसे जैसे तुम्हें देख रहा हूं वह इनके शिष्य बने बाद मे वही शिष्य स्वामी विवेकानन्द के नाम से विश्व प्रसिद्ध हुए। स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 को धर्म सम्मेलन में अपने भाषण से भारत का परचम विश्व में फहरा दिया। स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने 16 अगस्त 1886 को महासमाधि लेते हुए देह का त्याग कर दिया। इस दौरान पंकज अग्रवाल, अंकित वार्ष्णेय, आशीष कुमार कश्यप, शिव कुमार, दीपक सैनी, नदीम, विशाल, सपना ने विचार व्यक्त किए।
……………