ऽ छात्र आंदोलन के समर्थन में उतरे गांधीवादी चिंतक राजनाथ शर्मा, पीएम को लिखा पत्र

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बाराबंकी। 1974 में हुए छात्र आंदोलन और संपूर्ण क्रांति के आंदोलन के सत्याग्रही एवं गाँधीवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। शुक्रवार को राजनाथ शर्मा ने खराब स्वास्थ्य के बावजूद देवा रोड स्थित गाँधी भवन में महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर आकर फूल चढ़ाए और उन्होंने छात्र आन्दोलन को समर्थन किया। इस दौरान राजनाथ शर्मा ने दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई पर चिंता जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि दमनकारी कदम उठाने के बजाय, सरकार को छात्रों के साथ सीधी बातचीत करके उनके मुद्दे सुलझाने चाहिए। लोकतंत्र में, मतभेदों को दूर करने के लिए दमनकारी नहीं, बल्कि बातचीत और चर्चा का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। श्री शर्मा ने बताया कि खराब सेहत की वजह से वह दिल्ली के जंतर मंतर पर नहीं पहुँच पाए। इसलिए गाँधी भवन में उन छात्रों के समर्थन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनकी मांग को न्योचित बता रहे है। राजनाथ शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखाकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने लिखा, नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों में बीते दिनों हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें बहुत परेशान करने वाली हैं।read more:https://khabarentertainment.in/administration-gears-up-for-kanwar-yatra-divisional-commissioner-issues-strict-directives/ ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी के भी हित में नहीं हैं। हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, या बहुत अधिक बल का प्रयोग हर कीमत पर टाला जाना चाहिए। आज, देश भर में लाखों युवा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया में देरी, बेरोजगारी और कई दूसरी चिंताओं की वजह से परेशान हैं. इस चिंता को सिर्फ कानून-व्यवस्था के मुद्दे के तौर पर नहीं, बल्कि समाज के दर्द और उम्मीदों की झलक के तौर पर देखना जरूरी है। उन्होंने लिखा, इससे पहले, 2024 में नीट एग्जाम पेपर लीक को लेकर विवाद सामने आया था। इस साल भी, पेपर तब लीक हुआ जब 22 लाख स्टूडेंट परीक्षा दे रहे थे। निराशा में 22 स्टूडेंट ने सुसाइड कर लिया। दोबारा हुई परीक्षा के रिजल्ट को लेकर भी बड़ी गड़बड़ियों की खबरें थीं। जब भी प्रशासनिक कमियां सामने आती हैं, तो सरकार का अपने नीचे काम करने वालों पर दोष मढ़ना और किसी भी सफलता का श्रेय खुद लेना सही नहीं है। श्री शर्मा ने लिखा कि सरकार को लोगों की चिंताओं का समाधान दबाव के बजाय संवाद के जरिए करना चाहिए। उन्होंने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल को समाप्त कराना सरकार का साहसिक कदम बताया। श्री शर्मा ने कहा सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि छात्रों की मांग पर अविलंब विचार करते हुए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले अन्यथा उन्हें बर्खास्त करें।

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