दुर्गत का जंजाल खड़ा है, विद्युत विभाग बेहाल खड़ा है।

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आज़मगढ़ जनपद में बिजली व्यवस्था को लेकर जनता का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार की ओर से बेहतर और पर्याप्त बिजली आपूर्ति के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिले के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का आरोप है कि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। उपभोक्ताओं का कहना है कि रोस्टिंग और ओवरलोडिंग के नाम पर पूरी पूरी रात बिजली गायब रहती है। जो बिजली आती भी है, वह कुछ मिनटों में ट्रिप होकर फिर चली जाती है।मोहम्मदपुर, मेहनगर, बूढ़नपुर, अहरौला, पवई, जहानागंज, तरवां, सगड़ी और जिले के कई अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार बिजली संकट की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि रात होते ही बिजली की आंख मिचौली शुरू हो जाती है। कई बार पूरी रात अंधेरे में गुजरती है, जिससे बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे, मरीज, किसान, छात्र और छोटे व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से समाचार पत्रों में लगातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं। सोशल मीडिया पर जर्जर पोल, लटकते 11000 वोल्ट के तार, टूटी एलटी लाइनें, शॉर्ट सर्किट, ट्रिपिंग और घंटों बिजली कटौती की तस्वीरें और वीडियो साझा किए जा रहे हैं। 1912 हेल्पलाइन, जनसुनवाई पोर्टल और विभागीय अधिकारियों को दर्जनों शिकायतें भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद लोगों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा।सबसे गंभीर आरोप यह है कि आपातकालीन स्थिति में भी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पाता। ग्रामीणों का कहना है कि जब रात में कहीं हाईटेंशन लाइन टूट जाती है, ट्रांसफार्मर में आग लग जाती है, शॉर्ट सर्किट होता है या बिजली का पोल झुक जाता है, तब कई बार संबंधित अधिकारियों के फोन नहीं उठते। ऐसे में पूरा गांव अपने स्तर पर लोगों को खतरे से बचाने की कोशिश करता है।मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र क्षेत्र के कई गांवों में आज भी झुके हुए बिजली के पोल, नीचे लटकती 11000 वोल्ट की लाइनें और जर्जर एलटी तार खुलेआम खतरा बने हुए हैं। बरसात के मौसम में यह स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर हादसे की आशंका महीनों से बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।read more:https://khabarentertainment.in/administration-gears-up-for-kanwar-yatra-divisional-commissioner-issues-strict-directives/जिले में हाल के महीनों में करंट लगने से कई लोगों की जान जा चुकी है। कहीं 33000 वोल्ट की लाइन की चपेट में आकर युवती की मौत हुई, कहीं हैंडपंप में उतरे करंट ने महिला की जान ले ली और कई अन्य स्थानों पर टूटे तार व विद्युत फॉल्ट हादसों का कारण बने। इसके बावजूद लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हर हादसे के बाद केवल जांच और आश्वासन ही क्यों मिलता है।उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत करने पर हर बार एक जैसा संदेश आता है कि “आपकी शिकायत दर्ज कर ली गई है”, “संबंधित अधिकारी को भेज दी गई है” और “शीघ्र समाधान किया जाएगा”। लेकिन गांवों में आज भी वही जर्जर तार, झुके हुए पोल और अनियमित बिजली आपूर्ति दिखाई देती है।लोगों का कहना है कि सरकार 24 घंटे बिजली आपूर्ति का लक्ष्य बता रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों को पूरी रात अंधेरे में रहना पड़ता है। जनता सवाल पूछ रही है कि यदि बिजली उपलब्ध है, तो आखिर बार बार रोस्टिंग, ट्रिपिंग और घंटों कटौती क्यों हो रही है। यदि व्यवस्था में तकनीकी कमी है, तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी किसकी है।ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे जनपद की बिजली व्यवस्था का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए। सभी जर्जर पोल, लटकते 11000 वोल्ट और एलटी तार तत्काल बदले जाएं। प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 24 घंटे सक्रिय आपातकालीन संपर्क व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और शिकायतों के निस्तारण का भौतिक सत्यापन कराया जाए।जनता का कहना है कि अब उन्हें कागजों में दर्ज कार्रवाई नहीं, बल्कि गांवों में दिखाई देने वाला बदलाव चाहिए। क्योंकि बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा, शिक्षा, खेती, रोजगार और जीवन से जुड़ा सबसे बुनियादी अधिकार है। जब पूरी रात अंधेरा हो, फोन न उठें और जर्जर तार मौत का खतरा बने रहें, तब सवाल केवल बिजली का नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही का बन जाता है।

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