फर्जी मदरसे के नाम पर सरकारी धन के गबन का मामला, SIT जांच में वांछित आरोपी जितेन्द्र सिंह चौहान गिरफ्तार

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आजमगढ़।फर्जी मदरसे के नाम पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर लाखों रुपये के शासकीय धन के कथित गबन के मामले में दीदारगंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। राज्य विशेष अपराध अनुसंधान दल (SIT) की जांच में वांछित चल रहे आरोपी जितेन्द्र सिंह चौहान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश की जा रही थी।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना दीदारगंज पुलिस ने बुधवार सुबह आजादनगर बाजार से आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार अभियुक्त को सुबह लगभग 9:05 बजे दबिश देकर हिरासत में लिया गया, जिसके बाद उससे पूछताछ की जा रही है।पुलिस के मुताबिक, मामले का खुलासा राज्य विशेष अपराध अनुसंधान दल (SIT) की जांच के दौरान हुआ। 19 फरवरी को एसआईटी मुख्यालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निरीक्षक के.बी.पी. सिंह की तहरीर पर थाना दीदारगंज में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि फूलपुर क्षेत्र के ग्राम पाइन्दापुर में कागजों पर संचालित दिखाए गए मदरसा “गफ्फरुल ओलूम” (मदरसा आईडी 191100507) के नाम पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया गया और शासकीय धनराशि का दुरुपयोग किया गया।read more:https://pahaltoday.com/barabanki-festival-will-be-inaugurated-from-april-10/जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रकरण में मदरसे के प्रबंधक, शिक्षक तथा मान्यता प्रक्रिया से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि कूटरचित अभिलेखों के आधार पर सरकारी धन प्राप्त किया गया, जबकि संबंधित मदरसे का वास्तविक अस्तित्व ही संदिग्ध पाया गया।मुकदमा दर्ज होने के बाद से पुलिस और एसआईटी की टीम आरोपी की तलाश में लगातार जुटी हुई थी। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने बुधवार को आजादनगर बाजार से आरोपी जितेन्द्र सिंह चौहान को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य आरोपितों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है।यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेजों के सहारे शासकीय योजनाओं का लाभ लेने से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि इस प्रकरण में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ाई जाएगी।

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