इमरजेंसी के खिलाफ सड़क से जेल तक लड़ी लड़ाई, चर्चा में लोकतंत्र सेनानी

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बड़हलगंज। देश में आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर उन लोगों की याद फिर ताजा हो रही है जिन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। बड़हलगंज के लोकतंत्र रक्षक सेनानी गुलाब दत्त जायसवाल भी ऐसे ही नामों में शामिल हैं, जिन्होंने विरोध दर्ज कराने के लिए जेल जाना स्वीकार किया, लेकिन अपने विचारों से समझौता नहीं किया।जायसवाल छात्र जीवन से ही राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े थे। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश और राजनीतिक दमन के खिलाफ सत्याग्रह का मार्ग चुना।14 जनवरी 1976 को गोरखपुर के गणेश चौक पर आपातकाल और कांग्रेस सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में सत्याग्रह करते समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उन्हें बिछिया जेल, गोरखपुर में रखा गया।जायसवाल लगभग एक वर्ष दो माह से अधिक समय तक जेल में रहे। इस दौरान वे परतावल के महंगू मिश्र और खजनी के भरत सिंह सहित अन्य लोकतंत्र सेनानियों के साथ बंद थे। उन्होंने इमरजेंसी की समाप्ति तक यातनाएं सहीं, लेकिन अपने विचारों और लोकतंत्र की रक्षा के संकल्प से पीछे नहीं हटे।read more:https://pahaltoday.com/city-international-school-inaugurated-in-devan/गुलाब दत्त जायसवाल का सार्वजनिक जीवन केवल आपातकाल विरोध तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 1970 में नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षण के बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय में अध्ययन करते हुए महानगर की विभिन्न शाखाओं में शाखा कार्यवाह के रूप में दायित्व निभाया।गुलाब दत्त जायसवाल अयोध्या कार सेवा में भी सहभागी रहे। विद्या भारती की गोपाल शिक्षा समिति में जिला कोषाध्यक्ष रहे, आजीवन सदस्य हैं और सरस्वती शिशु मंदिर बड़हलगंज व कौड़ीराम के पूर्व प्रबंधक भी रहे। वर्तमान में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बड़हलगंज नगर संघचालक हैं और उत्तर प्रदेश सरकार से लोकतंत्र रक्षक सेनानी की मान्यता प्राप्त है।अपनी संगठनात्मक क्षमता, अनुशासन और समर्पण के कारण वे लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में रहे। उन्होंने गोरखपुर जिले में चार दशकों तक जिला व्यवस्था प्रमुख के रूप में अनेक बड़े कार्यक्रमों को सफल बनाया।आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर उनका जीवन नई पीढ़ी को यह संदेश देता है कि लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि साहस, त्याग और सतत सजगता से सुरक्षित रहने वाली राष्ट्रीय चेतना है।

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