हापुड़ विधानसभा एसी,/एसटी,/ ओबीसी युवाओं में बसपा से मोहभंग

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हापुड । 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा के होते कमजोर संगठन ने कमजोर प्रत्याशी उतार कर भाजपा की जीत सुनिश्चित कर दी, हापुड़ विधानसभा बसपा के कमजोर संगठन के द्वारा किए गए घोषित प्रत्याशी व घोषित प्रत्याशी के  परिवार द्वारा, जाटव समाज के लिए कोई सामाजिक कार्य एवं एससी एसटी ओबीसी माइनॉरिटी समाज के लिए कोई योगदान सामने नहीं आ रहा बसपा संगठन ने दिल्ली में पुलिस की नौकरी नौकरी करने वाले  व्यक्ति को प्रत्याशी बनाकर खड़ा कर दिया जिस पर एससी एसटी ओबीसी माइनॉरिटी समाज विश्वास नहीं कर पा रहा हापुड़ विधानसभा 59 के मतदाताओं ने बताया और आरोप लगाया भाजपा प्रेम” का आरोप  युवाओं का कहना है कि मायावती के भाजपा के प्रति नरम रुख और 2027 चुनाव में हापुड़-59 से कमजोर प्रत्याशी जल्दी घोषित करने से बसपा से भरोसा टूटा है। . एससी एसटी ओबीसी माइनॉरिटी समाज के युवा दूसरे दलों से जुड़ाव   अब ASP – आजाद समाज पार्टी, चंद्रशेखर आजाद और सपा – अखिलेश यादव के “संविधान बचाओ” अभियान से जुड़कर SC/ST/OBC माइनॉरिटी वर्ग के युवा सम्मान पाने की बात कर रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/why-is-samajwadi-party-chief-akhilesh-yadav-branded-as-anti-ram-mandir/ उनका मकसद भाजपा को रोकना बताया जा रहा है।  एससी एसटी एक्ट की बहाली में बसपा के द्वारा घोषित प्रत्याशी ने आंदोलन में भाग भी नहीं लिया  राजनीतिक समीकरण:  हापुड़-59 रिजर्व सीट है। यहां SC/ST/OBC वोट निर्णायक हैं।  ये वर्ग बसपा से हटकर ASP या सपा की तरफ शिफ्ट होता दिखाई दे रहा है और 2027 के चुनाव का गणित बदल सकता है।

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