परशदेपुर, रायबरेली। बूढ़ी माता मंदिर प्रांगण,पछुआबारा में चल रही नव दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन गुरुवार,28 मई 2026 को श्रद्धालुओं ने सती चरित्र एवं शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण श्रवण किया। कथा स्थल पर शाम होते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।कथा व्यास पूज्य धर्मेश हरि जी महाराज ने सती चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था। एक बार दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया,जिसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया,लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया। पिता के घर यज्ञ होने की सूचना मिलने पर माता सती बिना निमंत्रण ही वहां पहुंच गईं।यज्ञ स्थल पर उन्होंने भगवान शिव का अपमान होते देखा और सुना। पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण माता सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर का त्याग कर दिया। इस मार्मिक प्रसंग को सुनकर कथा पंडाल में गहरा मौन छा गया और अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।महाराज जी ने आगे बताया कि अगले जन्म में माता सती ने हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। भगवान शिव को पुनः पति रूप में पाने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने सप्तऋषियों को विवाह प्रस्ताव लेकर भेजा।read more:https://pahaltoday.com/indias-dominance-in-space-technology-joins-the-us-china-club/इसके बाद शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया। शिवजी की अनोखी बारात में भूत-प्रेत,शिवगण, नाग और भस्म रमाए गणों का वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिव-पार्वती का पाणिग्रहण संपन्न हुआ। विवाह के मंगल गीतों पर महिलाओं ने भक्ति भाव से नृत्य किया और पूरा पंडाल “बम बम भोले” तथा “सत्यम शिवम सुंदरम” के जयघोष से गूंज उठा। मुख्य यजमान संतोष भदौरिया रहे। कथा में रमेश कौशल,रामू कौशल,अतुल सिंह,अभिषेक सिंह एवं सुधीर श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा प्रतिदिन सायं 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक आयोजित की जा रही है। कथा व्यास ने कहा कि जिस दिन राम कथा में सती चरित्र और शिव विवाह का प्रसंग आता है, वह दिन प्रेम,तप,त्याग और समर्पण का महापर्व बन जाता है। इस कथा को सुनने से परिवारों में प्रेम,सौहार्द और वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ती है।