मोदी की  विदेश यात्रा से भारत को क्या फायदा होता है ?

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अशोक भाटिया ,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं से भारत को रणनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर सीधा फायदा होता है। इन दौरों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, विदेशी निवेश आने से भारत में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा व हितों को मजबूती मिलती है।इन यात्राओं के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौतों और निवेश संधियों पर बातचीत होती है। इससे भारतीय उत्पादों के लिए विदेशी बाजार खुलते हैं और देश में भारी मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आता है।खाड़ी देशों (जैसे यूएई) के साथ संबंधों को मजबूत करके भारत अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल, एलपीजी की स्थिर आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण सुनिश्चित करता है।हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों की विदेश यात्रा के तीसरे चरण में  स्वीडन पहुंचें। तो हम उनकी स्वीडन यात्रा की बात कतरे है । इस समय प्रधानमंत्री  मोदी स्वीडन के शहर गोथेनबर्ग की आधिकारिक यात्रा कर रहे है । यह प्रधानमंत्री मोदी की दूसरी स्वीडन यात्रा होगी। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए स्वीडन का दौरा किया था। इस बार की यात्रा को भारत और स्वीडन के बीच बढ़ते रणनीतिक, तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन टेक्नोलॉजी, रक्षा उत्पादन और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है।अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक कर रहे है । दोनों नेताओं के बीच व्यापार और निवेश, ग्रीन ट्रांजिशन, उभरती तकनीक, AI, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।भारत और स्वीडन अब एक-दूसरे को टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में पूरक साझेदार के रूप में देख रहे हैं। स्वीडन दुनिया की सबसे इनोवेटिव अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और भारत तेजी से डिजिटल तथा तकनीकी महाशक्ति के रूप में उभर रहा है।प्रधानमंत्री मोदी यूरोपियन राउंडटेबल फॉर इंडस्ट्री कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लेंगे। इस मंच पर यूरोपीय संघ, EFTA और ब्रिटेन के कई बड़े उद्योगपति मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम को प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन संयुक्त रूप से संबोधित करेंगी।माना जा रहा है कि इस दौरान भारत में निवेश, सप्लाई चेन विविधीकरण और हाई-टेक सेक्टर में साझेदारी को लेकर कई अहम चर्चाएं हो सकती हैं।भारत और स्वीडन के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 7।75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।भारत में 280 से अधिक स्वीडिश कंपनियां सक्रिय हैं, जबकि स्वीडन में 75 से ज्यादा भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं। दोनों देश अब ग्रीन इंडस्ट्री, डिजिटल इनोवेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।भारत और स्वीडन ने जलवायु परिवर्तन और हरित औद्योगिक परिवर्तन के क्षेत्र में भी मजबूत साझेदारी विकसित की है। दोनों देशों ने 2019 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के दौरान वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के साथ मिलकर LeadIT पहल शुरू की थी। इसके बाद 2023 में दुबई में आयोजित COP28 सम्मेलन में LeadIT 2।0 लॉन्च किया गया।इसी साल फरवरी में एआई इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) के दौरान भारत और स्वीडन ने स्वीडन-इंडिया टेक्नोल़ॉजी एंड एआई कॉरिडोर स्थापित करने के लिए समझौता किया था। इस पहल का उद्देश्य AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी और उभरती तकनीकों में सहयोग को बढ़ाना है।रक्षा क्षेत्र में भी भारत और स्वीडन के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। स्वीडिश रक्षा कंपनी Saab ने हरियाणा में कार्ल-गुस्ताफ हथियार प्रणाली की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की है। यह स्वीडन के बाहर Saab की पहली ऐसी फैक्ट्री है और भारत में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के तहत स्थापित पहला रक्षा उत्पादन संयंत्र भी माना जा रहा है।स्वीडन में रहने वाला 90 हजार से अधिक भारतीय समुदाय दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिक्षा, टेक्नोलॉजी, रिसर्च और बिजनेस के क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दे रही है।प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-स्वीडन संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ व्यापार, तकनीक, रक्षा और प्रतिभा आधारित सहयोग को और मजबूत करने वाली मानी जा रही है।read more:https://pahaltoday.com/azad-samaj-partys-membership-drive-in-balha-crowd-gathered-on-the-birth-anniversary-of-great-men/गौरतलब है कि साल 2014 में सत्ता की बागडोर संभालने वाले प्रधानमंत्री  मोदी ने अपने पांच साल के कार्यकाल में कुल 92 विदेशी दौरे किए, इस दौरान वो कुल 57 देशों में गए। प्रधानमंत्री  मोदी के इन दौरों की एक खास बात यह भी रही कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तुलना में प्रधानमंत्री  मोदी के ये दौरे तीन गुना अधिक हैं। मोदी के इन दौरों को ध्यान से देखा जाए तो एक बात यह भी साफ होती है कि इनमें से कई दौरों पर हुए समझौते से भारत को कुछ खास हासिल नहीं हुआ है। करीब एक तिहाई दौरे तो किसी प्रकार के समिट को लेकर रहे। लेकिन, कई दौरे ऐसे रहें जब विदेशी जमीन पर नई दिल्ली की शान भी बढ़ी है। इस दौरान वो कुछ देशों के प्रतिनीधियों से एक से भी अधिक बार मिले। इनमें जापान के शिंजो आबे, रूस के व्लादिमीर पुतिन रहे, जिनके देश भारत को औद्योगिक निवेश और रक्षा तकनीक को लेकर मदद करता है। इन दौरों पर उन्होंने उभरते देशों की श्रेणी में भारत की शक्ति को वैश्विक स्तर पर दिखाया।बीते पांच सालों के दौरान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश  के तौर पर 193 अरब डाॅलर आया है। UPA सरकार के अंतिम पांच साल की तुलना में यह 50 फीसदी से भी अधिक रकम है। इसी समय, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार मुहैया कराने के कई प्रयास किए गए, लेकिन इसके बावजूद एफडीआई से केवल भारत के सर्विस और पूंजी आधारित उद्योगों को ही फायदा मिला। श्रमिक वर्ग को FDI से कोई फायदा मिलते नहीं दिखाई दिया। अपने व्यापारिक प्रतिद्वंदी चीन से भारत निवेश प्रतिबद्धता हासिल करने में कामयाब तो रहा, लेकिन अभी तक इनकी शुरुआत नहीं हो सकी है। पिछले चार सालों में चीन से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के तौर पर 1।5 अरब डाॅलर ही आ सके हैं। बता दें कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साल 2014 से अगले पांच सालों में 20 अरब डाॅलर की एफडीआई की बात की थी।मोदी सरकार में ही भारत ने पहली बार अमरीका से कच्चा तेल और एलपीजी कार्गो खरीदना शुरू किया था। बीते पांच सालों में, भारत के लिए तेल को लेकर रूस और खाड़ी देशों से भी कई समझौते किए। प्रधानमंत्री  मोदी की वजह से ही दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी सउदी अरामको भारत की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी में निवेश के लिए तैयार हुई। यूएई अब भारत के आॅयल रिजर्व बनाने में भी मदद करेगा। इससे वित्तीय स्तर पर भारत को मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर देखें तो भारत को उर्जा के स्तर पर सुरक्षित करने के लिए पीए मोदी खाड़ी देशों से बेहतर रिश्ते बनाने में कामयाब रहे हैं।इन पांच सालों में प्रधानमंत्री  मोदी कई देशों को भारत में रणनीतिक प्रोजेक्ट के लिए तैयार किए हैं। किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री द्रवारा इजरायल के दौर पर प्रधानमंत्री  मोदी ने तेल अवीव से एडवांस रक्षा से लेकर पानी के कई तकनीक को लाने में कामयाब रहे हैं। जापान के साथ, भारत बुलेट ट्रेन बना रहा है। हालांकि, इसकी धीमी गति और भूमि अधिग्रहण को लेकर उनकी काफी आलोचना भी हुई है। साल 2016 में, फ्रांस से 36 रफाल लड़ाके विमान खरीदने का सौदा किया है। इसपर भी विपक्षी दलों ने मजबूूती से सरकार को घेरने का प्रयास किया है।अपने दौरे से प्रधानमंत्री  मोदी ने दुनिया में भारत की साख को बढ़ाने के भी कई प्रयास किए हैं। उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में भारत निवेश के लिए एक बेहतर जगत बनता जा रहा है। उन्होंने डावोस में वल्र्ड इकोनाॅमिक फोरम को भी संबोधित किया। पिछले साल वुहान शहर में मोदी ने शी जिनपिंग से अनौपचारिक मुलाकात भी की। इसके बाद हिमालय क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं की भूराजनीतिक तनाव कम करने में भी मदद मिली है।दुःख इस बात का है कि  इन सभी दौरों के बीच पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का दौरा भारत के लिए किसी भी मायने में सफल नहीं रहा।

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