“सामुदायिक शौचालय पर वर्षों से ताला, ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गई सरकारी योजना”

Share
कायमगंज /विकासखंड कायमगंज की ग्राम पंचायत मीरपुर कमरुद्दीन नगर में लाखों रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक शौचालय आज जनउपेक्षा का प्रतीक बनकर रह गया है। वर्षों से इस पर ताला लटका हुआ है और इसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।ग्रामीणों का कहना है कि यह शौचालय पूर्व ग्राम प्रधान दीपक कठेरिया के कार्यकाल में बनवाया गया था, लेकिन इसकी लोकेशन शुरू से ही विवादों में रही। शौचालय को गांव से लगभग 200 से 250 मीटर दूर बागों के बीच बना दिया गया, जिससे आम लोगों के लिए वहां तक पहुंचना असुविधाजनक हो गया। यही कारण है कि निर्माण के बाद से ही इसका उपयोग नहीं हो सका और यह योजना कागजों तक ही सीमित रह गई।read more:https://khabarentertainment.in/the-seed-oil-debate-science-myth-and-heart-health-by-dr-archita-mahajan/गांव के निवासी रंजीत, बीपी सिंह, जोगराज, राजवीर और आमोद समेत कई लोगों ने बताया कि यदि शौचालय का निर्माण गांव के भीतर या आबादी के नजदीक कराया गया होता, तो इसका लाभ सीधे ग्रामीणों को मिलता और खुले में शौच जैसी समस्या पर भी अंकुश लगता। लेकिन गलत स्थान चयन के चलते यह पूरी तरह बेकार साबित हो रहा है।हैरानी की बात यह है कि वर्तमान प्रधान के कार्यकाल में इस बंद पड़े शौचालय पर रंग-रोगन कराकर खानापूर्ति कर दी गई, जबकि जमीनी हकीकत में स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सिर्फ कागजी उपलब्धि दिखाने के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।यह मामला केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों पर भी सवाल खड़े करता है, जिसका मकसद गांव-गांव में स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराना और खुले में शौच की प्रथा को खत्म करना है। लेकिन मीरपुर कमरुद्दीन नगर में यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि या तो इस शौचालय को गांव के नजदीक स्थानांतरित किया जाए अथवा इसे उपयोगी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि जनता को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *