सहारनपुर। प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत विजिलेंस टीम ने सहारनपुर में बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक आयुक्त स्तर के एक राजस्व कर अधिकारी को ₹1 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से जीएसटी विभाग में हड़कंप मच गया है और विभागीय स्तर पर भी जांच शुरू कर दी गई है।read more:https://khabarentertainment.in/saffron-flag-hoisted-at-shyama-prasads-birthplace-bjp-to-form-government-in-bengal-for-the-first-time/प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी की पहचान सुनील कुमार के रूप में हुई है, जो सीटीओ कार्यालय की सचल दल द्वितीय इकाई, दिल्ली रोड सहारनपुर में तैनात था। विजिलेंस टीम ने सुनियोजित ट्रैप के दौरान उसे रंगे हाथ पकड़ लिया और हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।यह पूरा मामला एक व्यापारी की शिकायत से जुड़ा है, जो सहारनपुर से रुड़की तक माल की आपूर्ति करता है। व्यापारी ने आरोप लगाया कि आरोपी अधिकारी चेकिंग के दौरान जानबूझकर बिलों में कमियां निकालकर उसे परेशान करता था और अवैध वसूली का दबाव बनाता था।शिकायत के अनुसार 28 मार्च 2026 को सहारनपुर बाईपास पर आरोपी ने व्यापारी के वाहन को रोककर बिलों में आपत्ति लगाई और वाहन को राज्य कर कार्यालय में खड़ा करवा दिया। इसके बाद लगभग तीन लाख रुपये का जुर्माना जमा कराने का दबाव बनाया गया।बाद में आरोपी ने सरकारी जुर्माने के अतिरिक्त एक लाख पांच हजार रुपये नकद रिश्वत की मांग की। व्यापारी ने सरकारी राशि तो जमा कर दी, लेकिन नकद राशि देने से पहले उसने विजिलेंस विभाग से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।मामले में यह भी सामने आया कि आरोपी ने भविष्य में व्यापार सुचारू रूप से चलाने के लिए हर महीने एक लाख रुपये देने का दबाव बनाया था। लगातार उत्पीड़न से परेशान व्यापारी ने अंततः विजिलेंस टीम की मदद ली।शिकायत की पुष्टि होने के बाद मेरठ सेक्टर की विजिलेंस टीम ने ट्रैप बिछाया और जैसे ही आरोपी ने एक लाख रुपये की रिश्वत ली, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व विजिलेंस अधिकारी आजाद सिंह केसरी ने किया।गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी ताकि इसमें शामिल अन्य पहलुओं को भी सामने लाया जा सके।इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।