नकुड़ कस्बे में इन दिनों एक तालाब की खुदाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है जहां नगर पालिका द्वारा बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के पिछले एक महीने से लगातार खुदाई कराए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं इस पूरे मामले में न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि खनन सामग्री को निजी कॉलोनी में डाले जाने की चर्चाओं ने भी मामले को और गर्मा दिया है जानकारी के अनुसार नगर के सरसावा रोड स्थित तालाब संख्या 1249 में पिछले करीब एक महीने से पोकलेन मशीनों के जरिए दिन-रात खुदाई का कार्य चल रहा है स्थानीय लोगों का कहना है कि इस खुदाई के दौरान तालाब को करीब 25 से 30 फीट तक गहरा कर दिया गया है और वहां से निकलने वाली रेत और बालू को ट्रैक्टर ट्रॉलियों के माध्यम से पास की एक निजी कॉलोनी में डाला जा रहा है जिससे इलाके में दिनभर धूल मिट्टी उड़ रही है और आसपास के दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का आरोप है कि यह पूरा काम बिना किसी वैध टेंडर प्रक्रिया के कराया जा रहा है जबकि नगर पालिका द्वारा तालाब की रिटेनिंग वॉल निर्माण के लिए लगभग 56 लाख रुपये का टेंडर 17 अप्रैल को खोला जाना प्रस्तावित है ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब अभी टेंडर प्रक्रिया पूरी भी नहीं हुई है तो एक महीने से खुदाई किस आधार पर कराई जा रही है इस मामले को लेकर नगर में चर्चाएं भी तेज हो गई हैं कि तालाब से निकाली जा रही रेत और मिट्टी को एक कथित रूप से पालिका से जुड़े कालोनाइजर की कॉलोनी में भराव के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे लाखों रुपये का लाभ पहुंचाया जा रहा है हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन पालिका प्रशासन की चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया हैreads more:https://khabarentertainment.in/14-prominent-social-workers-were-honored-on-baba-sahebs-birth-anniversary/ इससे पहले इस तालाब को लेकर एक और विवाद सामने आया था जब मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने प्रशासन को शिकायत देकर तालाब के किनारे कब्रिस्तान होने का दावा किया था जिस पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम द्वारा लेखपाल को मौके पर भेजकर रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी लेखपाल की रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी है जिससे लोगों में नाराजगी देखी जा रही है इस पूरे मामले में जब नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विजय प्रताप सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि तालाब की चारदीवारी का निर्माण प्रस्तावित है जिसके लिए 56 लाख रुपये का टेंडर निकाला गया है और दीवार निर्माण के लिए खुदाई आवश्यक है लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही खुदाई और खनन सामग्री को निजी कॉलोनी में डाले जाने के आरोपों पर क्या कहना है तो उन्होंने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और चुप्पी साध ली
वहीं इस संबंध में एसडीएम सुरेंद्र कुमार का कहना है कि उन्होंने लेखपाल से रिपोर्ट मांगी थी और अब इस मामले को दिखवाया जाएगा उनके इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक स्तर पर भी अभी तक पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह कार्य नियमों के तहत किया जा रहा है तो इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और यदि इसमें किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए
यह पूरा मामला अब नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि तालाब की खुदाई वास्तव में विकास कार्य का हिस्सा है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है