कानपुर देहात।* सिद्धपीठ श्री धर्मगढ़ बाबा मंदिर परिसर में चल रही रामलीला में सोमवार रात परशुराम-लक्ष्मण संवाद की लीला ने ऐसा समां बांधा कि देर रात तक हजारों दर्शक अपनी जगह से नहीं हिले।
*जब टूटा शिव धनुष तो क्रोध से कांपा दरबार*
कथा के अनुसार जनक दरबार में जैसे ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भगवान शिव के दिव्य धनुष को तोड़ा, उसकी प्रचंड ध्वनि से धरती कांप उठी। उसी ध्वनि को सुनकर महाक्रोधी भगवान परशुराम हाथ में परशु लेकर दरबार में प्रकट हुए। उनका रौद्र रूप देखकर वहां उपस्थित सभी राजा-महाराजा सहम गए और जनक जी हाथ जोड़कर खड़े हो गए।परशुराम ने क्रोध में गरजते हुए कहा किस बालक ने मेरे गुरु भगवान शिव के धनुष को तोड़ने का दुस्साहस किया है? वह सामने आए, मैं उसका वध कर दूंगा। read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette
*राम की विनम्रता और लक्ष्मण की वीरता*
जहां श्रीराम ने अत्यंत विनम्रता से कहा भगवन, शिव धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा वहीं लक्ष्मण जी अपने तीखे स्वभाव में आ गए।लक्ष्मण जी ने व्यंग्य करते हुए कहा बहुत से धनुही तोड़ी बचपन में, आपने तो इसी धनुष को लेकर इतना हल्ला मचा दिया। बस फिर क्या था, परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। परशुराम का क्रोध और लक्ष्मण का निर्भीक, व्यंग्यात्मक जवाब सुनकर दर्शक लोटपोट हो गए। बीच-बीच में दर्शक लखन लाल की जय और जय परशुराम बाबा के जयकारे लगाते रहे।
*अद्भुत अभिनय ने मोहा मन*
परशुराम और लक्ष्मण बने कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय, संवाद अदायगी और भाव-भंगिमा से संवाद को जीवंत कर दिया। जब परशुराम ने कहा बालक बोलि बधौं नहिं तोही, केवल मुनि जड़ जानहि मोही… तो पंडाल तालियों से गूंज उठा।अंत में जब परशुराम को आभास हुआ कि राम स्वयं नारायण हैं, तो उनका क्रोध शांत हुआ और वे श्रीराम को प्रणाम कर चले गए। इस अद्भुत लीला के साथ पहले दिन की रामलीला का समापन हुआ।इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही और पूरा वातावरण राममय हो गया।इस मौके पर समस्त सत्संग मडल के पदाधिकारी मौकेपर रहे