बड़हलगंज। मुक्तिपथ पर देर रात आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में हास्य, व्यंग्य, ओज और श्रृंगार की कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देश के विख्यात हास्य-व्यंग्यकार डॉ. दिनेश बावरा ने अपनी चिर-परिचित शैली में सामाजिक कुरीतियों और राजनीतिक परिदृश्य पर तीखे कटाक्ष किए। उनकी रचनाओं ने जहां लोगों को खूब हंसाया, वहीं सामाजिक रिश्तों की अहमियत का संदेश भी दिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से पंडाल को ठहाकों से गुंजायमान कर दिया।काशी से आए हास्य कवि अनिल चौबे ने आम जनजीवन, पारिवारिक नोक-झोंक और पति-पत्नी के रिश्तों पर आधारित रचनाओं से खूब मनोरंजन किया। उन्होंने ‘ईश्वर का बनाया हुआ मुंह है, इसमें हमारी कोई गलती नहीं’ जैसी हास्यपूर्ण पंक्तियों के साथ वैवाहिक जीवन की परिस्थितियों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया। शादी से पहले चांद-तारों के वादे और शादी के बाद गृहस्थी की जिम्मेदारियों पर उनकी व्यंग्यात्मक प्रस्तुति सुनकर श्रोता हंसी से लोटपोट हो गए।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/वहीं, ओज के कवि सुमित ओरछा ने हिंदी और भारतीय संस्कृति की महत्ता पर अपनी प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं में जोश भर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी को समझे बिना हिंदुस्तान को समझना मुश्किल है। उनकी राष्ट्रभावना से ओतप्रोत कविता पर श्रोताओं ने तालियों से उत्साह बढ़ाया।सुप्रसिद्ध कवयित्री शशि श्रेया ने अपने मधुर स्वर में श्रृंगार और मानवीय संवेदनाओं को शब्दों में पिरोया। ‘मैं जब तक सामने हूं गुनगुना लो, मेरी तस्वीर लेकर क्या करोगे’ तथा ‘कड़ी धूप में पुरवाई है, मर्द पिता, बेटे, भाई हैं’ जैसी पंक्तियों ने श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।इसके अतिरिक्त वीर रस के कवि रुद्र प्रताप रुद्र, निर्भय निनाद और अनुज पांडेय ने भी अपनी रचनाओं से कवि सम्मेलन में उत्साह और काव्य रस का संचार किया। देर रात तक चले इस आयोजन में श्रोताओं ने कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।