सीकर (डॉ. महेश गुप्ता)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर में गुरुवार को ‘शिक्षक संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो.(डॉ.) अनिल कुमार राय ने मुख्य वक्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री देवदत्त जोशी का स्वागत किया। अभाविप के केंद्रीय कार्यकारिणी समिति सदस्य एवं विभाग संगठन मंत्री सीकर के श्री अभिनव सिंह ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए आगंतुकों का परिचय कराया। संवाद कार्यक्रम से पहले ‘एक पेड मां के नाम’ अभियान के तहत विवि परिसर में पौधारोपण किया गया।इस अवसर पर एबीवीपी के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री देवदत्त जोशी ने विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों से संवाद करते हुए कहा कि हमारे देश के युवाओं की ताकत और शक्ति का सही उपयोग होना चाहिए। किसी भी चीज को हासिल करने के लिए संघर्ष करना जरूरी होता है। पौधे को भी जमीन से बाहर आने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। देवदत्त जोशी ने विद्यार्थी परिषद की स्थापना से लेकर वर्तमान में चल रही गतिविधियों और उपक्रमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के लिए प्रवेश, परीक्षा और परिणाम विशेष महत्वपूर्ण है।read more:https://khabarentertainment.in/call-to-embrace-dr-syama-prasad-mookerjees-ideas-bjp-organizes-an-ideological-seminar/इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलसचिव श्रीमत श्वेता यादव , परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजेंद्र सिंह , उप कुलसचिव (अकादमिक) राम सिंह सरावग, सहायक कुलसचिव (परीक्षा) डॉ आरसी मीना, सहायक कुलसचिव (संपदा) कन्हैया लाल जांगिड़ समेत कई महाविद्यालयों के प्राचार्य और शिक्षक भी मौजूद रहे। एबीआरएसएम के अतिरिक्त महामंत्री डॉ अशोक महला, अभाविप के प्रांत गतिविधि प्रमुख बाबूलाल गुर्जर, अभाविप के जिला प्रमुख मनोज धनिया आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो.(डॉ.) अनिल कुमार राय ने कहा कि आजकल विश्वविद्यालय का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास करना है। उन्होंने शिक्षकों से बदलते समय के अनुरूप नवाचार, अनुसंधान और मूल्यपरक शिक्षा को बढ़ावा देने का आह्वान किया। प्रो. राय ने कहा कि अब आईआईटी में भी हिंदी में पाठ्यक्रम बनाया जा रहा है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों ने सहभागिता करते हुए शिक्षा के समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श किया। संवाद के दौरान शिक्षकों ने अपने सुझाव भी साझा किए तथा उच्च शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर चर्चा की। देवदत्त जोशी ने शिक्षकों के सवालों के जवाब भी दिए।