कानपुर देहात जहाँ से न्याय की परिभाषा लिखी जाती है, वहाँ से आज पर्यावरण-रक्षा का संकल्प भी लिखा गया। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्देशों के अनुपालन में रविवार को माननीय जनपद न्यायाधीश श्री रविंद्र सिंह के नेतृत्व में जनपद के समस्त सम्मानित न्यायिक अधिकारियों ने कचहरी भवन परिसर एवं जज कॉलोनी परिसर में वृक्षारोपण किया।
*न्याय-मंदिर से हरियाली का संदेश*
प्रातः काल माननीय जनपद न्यायाधीश श्री रविंद्र सिंह ने स्वयं फावड़ा उठाकर पौधरोपण कर अभियान का शुभारंभ किया। उनकी यह पहल उपस्थित अधिवक्ताओं व कर्मचारियों के लिए प्रेरणा बनी। श्री रविंद्र सिंह ने कहा — _“जिस तरह न्याय सबको समान छाँव देता है, उसी तरह पेड़ भी बिना भेदभाव के प्राण-वायु देता है। पर्यावरण की रक्षा भी एक प्रकार का न्याय है — आने वाली पीढ़ी के प्रति।”_
उनकी सादगी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की कचेहरी परिसर में मुक्त कंठ से सराहना हुई। अधिवक्ता समुदाय ने कहा कि माननीय जिला जज का यह कदम ‘न्यायपालिका के सामाजिक सरोकार’ का जीवंत उदाहरण है।read more:https://khabarentertainment.in/ghosiya-nagar-panchayats-entire-system-collapsed-during-just-five-minutes-of-rain/
*जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माननीय अध्यक्ष/माननीय जनपद न्यायाधीश श्री रविंद्र सिंह की सक्रिय भागीदारी बनी मिसाल*
वृक्षारोपण में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर देहात के माननीय अध्यक्ष /माननीय जनपद न्यायाधीश श्री रविंद्र सिंह की सक्रिय सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। माननीय जनपद न्यायाधीश, एवं सम्मानित न्यायिक अधिकारियों ने स्वयं पौधे रोपे और विधिक सेवा के कर्मचारियों एवं न्याय विभाग के कर्मचारियों को प्रत्येक पौधे को ‘गोद लेने’ का संकल्प दिलाया।
उन्होंने कहा — _“विधिक सेवा का काम केवल न्याय दिलाना नहीं, समाज को बेहतर जीवन दिलाना भी है। स्वच्छ पर्यावरण मौलिक अधिकार है, और उसकी रक्षा हमारा नैतिक कर्तव्य।”_ उनकी प्रेरणादायक उपस्थिति व समर्पण ने पूरे न्यायिक परिवार में नई ऊर्जा का संचार किया।
*यह सम्मानित न्यायिक अधिकारी रहे उपस्थित*
इस अवसर पर माननीय अपर जिला जज-13 श्री शरद त्रिपाठी, अपर जिला जज-14 श्री पीयूष तिवारी, अपर जिला जज कोर्ट संख्या-15 श्री सुरेंद्र सिंह, श्री आनंद प्रिय गौतम सहित जनपद के अन्य सम्मानित न्यायिक अधिकारीगणो एवं न्याय विभाग के कर्मचारियों ने छायादार, फलदार व औषधीय पौधों का रोपण किया।
*‘फैसले’ से ‘फर्ज’ तक का सफर*
कचेहरी परिसर, जहाँ रोज फैसले लिखे जाते हैं, आज वहाँ भविष्य की हरियाली की इबारत लिखी गई। न्यायिक अधिकारियों ने यह संदेश दिया कि कानून की किताब के साथ-साथ प्रकृति की किताब भी पढ़ना जरूरी है।
जनपद न्यायाधीश श्री रविंद्र सिंह एवं जनपद के अन्य सम्मानित न्यायिक अधिकारियों की पर्यावरण-हितैषी पहल न केवल अनुकरणीय है, बल्कि यह बताती है कि न्यायपालिका का दायरा केवल न्यायालय कक्ष तक सीमित नहीं — वह समाज और सृष्टि दोनों के प्रति उत्तरदायी है।
_*एक पेड़ न्याय के नाम — ताकि कल की सांस भी सुरक्षित रहे*।_