उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड राज्य की मांग उठने लगी है।विभिन्न संगठनों, पत्रकारों, कलाकारों, खिलाड़ियों और प्रधानों आदि ने इसकी मांग प्रधानमंत्री तक पहुंचना शुरू कर दिया है। चार बार के सांसद रहे गंगा चरण राजपूत ने तो प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि “1948 में बना बुंदेलखंड राज्य हमे वापस कर दीजिये”।गंगा चरण राजपूत बुंदेलखंड राज्य बनाओ के संयोजक है। वह बताते हैं कि 1948 में बुंदेलखंड की रियासत के 32 राजाओं ने भारत सरकार के साथ एक विलय संधि की थी, जिसके तहत इन राजाओं ने इस तर्ज पर भारत में विलय किया था की बुंदेलखंड राज्य को एक अलग राज्य का दर्जा दिया जाएगा। जिला संधि की तर्ज 1948 में हुए समझौते में भारत सरकार की ओर से बीपी मेनन में हस्ताक्षर किए थे। संधि में यह तय हुआ था की बुंदेलखंड को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में रखा जाएगा, जिसकी अपनी अलग विधानसभा, कार्यपालिका और न्यायपालिका होगी। इसके तहत बुंदेलखंड राज्य का निर्माण किया गया जिसके मुख्यमंत्री कामता प्रसाद सक्सेना बने और इसकी राजधानी नौगांव मध्य प्रदेश थी। लेकिन 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष के नाते फजर अली ने जो रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी उसमें बुंदेलखंड को बांट दिया। बुंदेलखंड का एक हिस्सा उत्तर प्रदेश में दूसरा हिस्सा मध्य प्रदेश में मिला दिया गया। तबसे आज तक बुंदेलखंड राज्य की लड़ाई चल रही है।बुंदेलखंड राज्य में उत्तर प्रदेश के झांसी, बांदा, ललितपुर, हमीरपुर, जालौन, महोबा और चित्रकूट है जबकि मध्य प्रदेश के सागर, दतिया, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और निवाड़ी के इलाके शामिल किए गए हैं। लंबे समय से यहां के लोग क्षेत्रीय पिछड़ेपन, पलायन, जल संकट और सीमित औद्योगिक विकास जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए अलग राज्य की मांग करते रहे हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और कई सामाजिक संगठन इस मुद्दे को नए सिरे से उठा रहे हैं। उनका कहना है कि विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए पृथक बुंदेलखंड राज्य ही स्थायी समाधान है। उत्तर प्रदेश के चरखारी से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने हाल ही में उरई में अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन की बात कही। समर्थकों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के समग्र विकास, युवाओं को रोजगार, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अलग राज्य आवश्यक है। विधायक का कहना है कि वह पिछले कई वर्षों से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं और अब इसे जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।बुंदेलखंड राज्य के समर्थक कहते हैं कि आज पूरे देश में बुंदेलखंड के मजदूर मजदूरी करने जाते हैं, जबकि बुंदेलखंड में हीरा, पन्ना, बालू जिसे लाल सोना कहते है के साथ पहाड़, पेड़ प्रचुर मात्रा में है। जिनका हर सरकार में अवैध कटान और खनन होता है। इसका असर यह हुआ कि इस वर्ष जून माह में बुंदेलखंड के बांदा जिले का तापमान तीन दिनों तक लगातार विश्व भर में सबसे ज्यादा 48.8 तक रहा। दुनिया भर के वैज्ञानिकों का यह मानना है की जो छोटे पहाड़ होते हैं वह भूकंप रोधी होते हैं, जब यह कटते जाएंगे तो एक दिन ऐसा आ जाएगा, बुंदेलखंड भूकंप का क्षेत्र हो जाएगा।read more:https://khabarentertainment.in/major-action-by-the-food-safety-department-sauce-factory-raided-550-kg-of-stock-destroyed/ गंगा चरण राजपूत कहते है कि जब बुंदेलखंड बन जाएगा तो मनरेगा मजदूरों की प्रतिदिन की मजदूरी 860 रुपए प्रतिदिन कर दी जाएगी और उसे किसी कार्यों से जोड़ दिया जाएगा जिसके चलते मजदूरों को कहीं और मजदूरी करने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। जब बुंदेलखंड राज बन जाएगा तो यहां एसडीएम से लेकर क्लर्क तक तथा सिपाही से लेकर सीओ तक सब की नियुक्तियां होंगी। इसके अलावा बेरोजगार युवाओं को रोजगार के लिए सस्ती दरों पर या सब्सिडी पर धन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वह अपने रोजगार के साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार देने में सक्षम हो सके। बुंदेलखंड राज्य बनाने के लिए संघर्ष करने वालों को लोकतंत्र सेनानी की तर्ज पर बुंदेलखंड सेनानी मानकर ₹10000 प्रतिमाह की पेंशन दी जाएगी। इसी तरह बुंदेलखंड राज्य बनने पर जूनियर अधिवक्ताओं को 5 साल तक ₹5000 प्रतिमाह प्रेक्टिस भत्ता दिया जाएगा। प्राइवेट शिक्षक और शिक्षकाओं को जो वेतन मिलता है उसमें 5 से ₹10000 तक प्रतिमा सहयोग सरकार करेगी। विभिन्न प्रदेशों में बुजुर्ग पत्रकारों को पेंशन मिल रही है उतनी ही पेंशन बुंदेलखंड के पत्रकारों को भी मिलेगी।गंगाचरण राजपूत बताते हैं कि उन्होंने बुंदेलखंड राज्य के लिए स्वर्गीय शंकर लाल मेहरोत्रा के साथ संघर्ष किया है, लाठियां खाई हैं, जेल गए हैं। बुंदेलखंड राज्य के लिए वह और उनका विधायक बेटा बृजभूषण सिंह राजपूत संघर्ष करते रहे हैं और संकल्प लेते हैं अपने मृत्यु होने तक बुंदेलखंड राज्य के लिए संघर्ष करते रहेंगे।बुंदेलखंड क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार सत्येंद्र पाल सिंह ने गंगा चरण राजपूत की अगुवाई में आंदोलन को हर तरह से सहयोग देने का आश्वासन दिया।देलखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महामंत्री दिनेश भार्गव ने भी साथ खड़े होने की बात कही। वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा कहते है कि 50 साल की पत्रकारिता के बाद उनका शेष जीवन बुंदेलखंड राज्य के लिए ही समर्पित रहेगा। उनका कहना है कि उत्तराखंड राज्य पत्रकारों की वजह से ही बना। वरिष्ठ पत्रकार रामसेवक अरजरिया, अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ी रेनू गोस्वामी, लोक कलाकार राधा प्रजापति, शिक्षक नेता राम सिया यादव, पूर्व एमएलसी श्याम सुंदर परीक्षा, घनश्याम कोरी, मनीष राजपूत, शैलेंद्र मोहन अवस्थी, संदीप सरावगी आदि समाजसेवियों के साथ प्रधान दीपेंद्र राजपूत, प्रधान महेंद्र गिरिराज सहित दर्जनों ग्राम प्रधानों, पत्रकारों, कलाकारों व खिलाड़ियों के साथ विभिन्न संगठनों ने बुंदेलखंड राज्य के लिए संघर्ष करने की बात कही। सभी समर्थकों का दावा है कि छोटे राज्य से प्रशासनिक दक्षता और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।