नई दिल्ली। पीपुल ऑफ इंडियन ओरिजिन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PIOCCI) के सैक्टरी जनरल कीर्ति शर्मा ने कहा है कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए केंद्रित व्यापार, निवेश और विदेश नीति के साथ-साथ वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय की संगठित आर्थिक भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उनका मानना है कि प्रवासी भारतीय केवल भावनात्मक रूप से भारत से जुड़े लोग नहीं हैं, बल्कि वे देश के लिए एक बड़ी रणनीतिक शक्ति हैं। कीर्ति शर्मा के अनुसार, अब समय आ गया है कि प्रवासी भारतीयों की सद्भावना, पूंजी, तकनीक और वैश्विक बाजारों तक पहुंच को भारत के आर्थिक विकास से जोड़ा जाए। PIOCCI का उद्देश्य इसी वैश्विक क्षमता को भारत की स्थानीय आर्थिक प्रगति से जोड़ना है, विशेषकर विनिर्माण, MSME, प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि PIOCCI अन्य प्रवासी संगठनों की तरह केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों या परोपकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह व्यापार, निवेश सुविधा और सप्लाई चेन एकीकरण पर केंद्रित संस्था है। खास बात यह है कि संस्था का विशेष ध्यान भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों पर है, जहां वास्तविक आर्थिक परिवर्तन की सबसे अधिक संभावनाएं हैं। शर्मा ने कहा कि भारत को केवल विदेशी प्रेषण (Remittances) पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। देश के भविष्य के लिए निवेश-आधारित भागीदारी जरूरी है, जिसमें नए उद्योग, निर्यात, रोजगार और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों का निर्माण शामिल हो। उनका कहना है कि यदि प्रवासी भारतीय छोटे स्तर पर भी निवेश करें, तो उसका सामूहिक प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा हो सकता है। उन्होंने “माइक्रो एफडीआई” की अवधारणा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार 10 लाख से 50 लाख अमेरिकी डॉलर तक के छोटे विदेशी निवेश भारत के MSME क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। ये अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले, शीघ्र लागू होने वाले और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने वाले निवेश हैं। कीर्ति शर्मा ने कहा कि PIOCCI विदेशी निवेशकों को भारत में प्रवेश संबंधी प्रक्रियाओं, नियमों, स्थानीय साझेदारों की पहचान, अनुपालन और राज्य स्तर पर सहयोग उपलब्ध कराकर जोखिम कम करने का काम करता है। उनका मानना है कि निवेशकों को सबसे अधिक जरूरत स्पष्टता, भरोसे और पूर्वानुमेय व्यवस्था की होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के टियर-2 और टियर-3 शहर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हीं क्षेत्रों में रोजगार-आधारित, स्थानीय रूप से जुड़े और विस्तार योग्य उद्योग मौजूद हैं। यदि इन्हें सशक्त किया जाए, तो भारत मजबूत सप्लाई चेन और समावेशी विकास का मॉडल बना सकता है।read more:https://khabarentertainment.in/womens-participation-will-be-strengthened-through-the-nari-shakti-vandan-act-dr-deepti-singh/
PIOCCI की आगामी योजना पर प्रकाश डालते हुए शर्मा ने कहा कि अगले दो-तीन वर्षों में संस्था अपने वैश्विक चैप्टरों का विस्तार करेगी, माइक्रो एफडीआई को बढ़ावा देगी, छोटे शहरों के उद्यम नेटवर्क को मजबूत करेगी और ज्ञान व निवेश प्रवाह के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करेगी। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से आह्वान किया कि वे भारत के विकास में भागीदारी के लिए बड़े कदम की प्रतीक्षा न करें। “छोटे से शुरू कीजिए, लेकिन सुव्यवस्थित तरीके से शुरू कीजिए, स्थानीय स्तर से शुरू कीजिए और साझेदारी के साथ आगे बढ़िए,” उन्होंने कहा।