मृतक की पत्नी को मिलेगा पॉलिसी का 2 लाख और 5 हजार वाद-व्यय 

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भदोही। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के 2 लाख रुपए का क्लेम न देने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 2 माह के अंदर मृतक विजय कुमार यादव की पत्नी परमिता को बीमा राशि 2 लाख रुपए वाद-व्यय 5 हजार रुपए अदा करे। बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा खमरियां के विरुद्ध परिवाद खारिज कर दिया गया है। परिवाद के अनुसार परिवादिनी परमिता के पति विजय कुमार यादव ने बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा खमरियां में बचत खाता खोला था, जिस पर पीएमएसबीवाई लागू थी। 28 मई 2024 को खाते से 20 रुपए प्रीमियम कटा था। 2 अगस्त 2024 को विजय कुमार कावड़ लेकर बाइक से जा रहे थे। हंडिया ब्रिज के पास तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। गंभीर हालत में जीवनदीप अस्पताल भदोही में इलाज के दौरान 3-4 अगस्त 2024 की रात 12:45 बजे उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद परमिता ने 21 सितंबर 2024 को बैंक के माध्यम से सभी प्रपत्रों के साथ क्लेम बीमा कंपनी के पोर्टल पर अपलोड कराया। बीमा कंपनी ने 25 सितंबर 2024 को क्लेम प्राप्ति की ऑनलाइन सूचना भी जारी की, पर बीमा राशि नहीं दी। आयोग ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य- एफआईआर, पोस्टमार्टम, क्लेम नोटिफिकेशन, बैंक स्टेटमेंट का परिशीलन किया। पाया गया कि बैंक ने 28 नवंबर 2024 को कंपनी की मांग पर सभी 6 दस्तावेज मेल से भेज दिए थे। इसके बाद भी कंपनी ने 24 दिसंबर व 26 दिसंबर 2024 को बैंक के सूचना मांगने पर कोई जवाब नहीं दिया।read more:https://pahaltoday.com/the-ceasefire-will-have-global-implications-for-energy-the-economy-and-diplomacy-which-will-be-a-relief-for-the-general-public/ एक जनवरी 2025 को फिर दस्तावेज मांगे और 23 सितंबर 2025 को जब बैंक ने दस्तावेज अपलोड करने चाहे तो कंपनी ने क्लेम पोर्टल ही बंद कर दिया। आयोग ने माना कि दस्तावेज पहले ही दिए जा चुके थे, बार-बार मांगना व पोर्टल बंद करना दर्शाता है कि बीमा कंपनी क्लेम निस्तारित करने का आशय नहीं रखती थी। बैंक द्वारा समय से क्लेम अपलोड व दस्तावेज भेजने के कारण बैंक के विरुद्ध सेवा में कमी नहीं मानी गई। आयोग ने निष्कर्ष दिया कि पीएमएसबीवाई में दुर्घटना मृत्यु पर नामिनी को 2 लाख देय है। ऐसे में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को 2 माह में परमिता को 2 लाख और 5 हजार वाद-व्यय देना होगा। अनुपालन न करने पर पूरी धनराशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करना होगा। परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार कर विपक्षी संख्या-2 कंपनी के विरुद्ध आदेश पारित किया गया, जबकि विपक्षी संख्या-एक बैंक के विरुद्ध खारिज किया गया।

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