स्मार्ट क्लास से स्मार्ट भविष्य की ओर बढ़ रहा सोनभद्र

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डिजिटल शिक्षा से बदल रही पढ़ाई की तस्वीर, ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को मिल रहा तकनीक आधारित शिक्षण का लाभ
सोनभद्र। बदलते दौर में शिक्षा को तकनीक से जोड़ने की दिशा में सोनभद्र में लगातार पहल की जा रही है। उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और कंप्यूटर शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण से जोड़ा जा रहा है। इससे खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षा की पहुंच बढ़ रही है।जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के अनुसार, स्मार्ट क्लास के जरिए कठिन विषयों को चित्र, वीडियो, डिजिटल कंटेंट और गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से आसान एवं रोचक तरीके से समझाया जा रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ने के साथ विषयों को समझने की क्षमता भी बेहतर हो रही है। वहीं आईसीटी लैब और कंप्यूटर शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थी तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान हासिल कर रहे हैं। डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल से बच्चों में तार्किक क्षमता, रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास और डिजिटल कौशल को मजबूती मिल रही है। पहले जहां ग्रामीण क्षेत्र के अनेक विद्यार्थी आधुनिक तकनीक और डिजिटल संसाधनों से सीमित रूप से परिचित हो पाते थे, वहीं विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी सुविधाओं के विस्तार से उन्हें सीखने के नए अवसर मिल रहे हैं। अब विद्यार्थी केवल पाठ्यपुस्तकों पर निर्भर रहने के बजाय डिजिटल माध्यमों से भी ज्ञान हासिल कर रहे हैं। विद्यालयों में उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि जिले का प्रत्येक बच्चा आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान से सशक्त होकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके। स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और कंप्यूटर शिक्षा के जरिए सोनभद्र के विद्यालयों में पढ़ाई का तरीका बदल रहा है। तकनीक के साथ शिक्षा का यह मेल विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और भविष्य की संभावनाओं को नई दिशा देने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/

दुरावल-शाहगंज क्षेत्र के क्लीनिकों की जांच की मांग, सीएमओ को सौंपा पत्र
सोनभद्र। दुरावल, शाहगंज और घोरावल क्षेत्र में संचालित कुछ निजी क्लीनिकों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए हैं। सामाजिक आरटीआई कार्यकर्ता कमलेश पाण्डेय ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र देकर संबंधित क्लीनिकों की अचानक और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पत्र में बिना आवश्यक पंजीकरण, चिकित्सकीय मानकों के उल्लंघन तथा मरीजों से कथित रूप से मनमानी फीस वसूले जाने की शिकायतों का उल्लेख किया गया है।सीएमओ को दिए पत्र में कहा गया है कि ग्रामीण एवं गरीब आदिवासी आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निजी क्लीनिकों पर निर्भर रहती है। ऐसे में यदि कोई स्वास्थ्य केंद्र बिना वैध पंजीकरण, योग्य चिकित्सक अथवा निर्धारित मानकों के संचालित हो रहा है तो इससे मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित क्लीनिकों में चिकित्सकों की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय योग्यता, पंजीकरण, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, दवाओं की वैधता, मरीजों से वसूली जा रही फीस और आवश्यक अभिलेखों की जांच कराई जाए। साथ ही जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कमलेश पाण्डेय ने कहा कि शिकायत का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करना नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित एवं वैध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की गंभीरता को देखते हुए समयबद्ध जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

 

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