आजमगढ़। में बिगड़ी बिजली व्यवस्था को लेकर भाजपा प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्य अभियंता कार्यालय में विरोध दर्ज कराने और अधिकारियों द्वारा जल्द सुधार के आश्वासन दिए जाने के बाद भी मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र क्षेत्र की स्थिति में कोई विशेष सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली संकट पहले की तरह बना हुआ है और विभागीय दावे केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। मोहम्मदपुर उपकेंद्र से जुड़े मंगरावा, मखदुमपुर, वजीरमलपुर, खालिसपुर, कोइलाडीह, मुजफ्फरपुर, बिंद्रा बाजार, रानीपुर रजमों, दयालपुर, मोहम्मदपुर, फरिहा, अबूसैदपुर सहित दर्जनों गांवों में बिजली आपूर्ति लगातार प्रभावित बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर दिनभर बिजली का इंतजार करना पड़ता है और जब आपूर्ति शुरू भी होती है तो कुछ ही देर में ट्रिपिंग शुरू हो जाती है।क्षेत्रीय लोगों के अनुसार सबसे गंभीर समस्या जर्जर विद्युत पोल और वर्षों पुराने तारों की है। कई गांवों में पोल झुक चुके हैं और तार खतरनाक तरीके से नीचे लटक रहे हैं। बरसात का मौसम शुरू होने से लोगों में किसी बड़े हादसे की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक व्यापक स्तर पर मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ।लोगों का आरोप है कि कोइलाडीह और साउथ फीडर पर बारी बारी से आपूर्ति देकर व्यवस्था को संभालने की कोशिश की जा रही है। इससे किसी भी क्षेत्र को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि बिजली व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है तो फीडरों को आधा आधा घंटा चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लगातार कटौती के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। किसानों को सिंचाई में परेशानी हो रही है। छात्र पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं और बुजुर्ग व मरीज सबसे अधिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/mohsina-kidwai-passes-away-an-era-has-come-to-an-end/ग्रामीणों ने मांग की है कि मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र की तकनीकी स्थिति की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही यह सार्वजनिक किया जाए कि आखिर बार बार फॉल्ट, ट्रिपिंग, लो वोल्टेज और सीमित आपूर्ति की वास्तविक वजह क्या है।क्षेत्र की जनता अब अधिकारियों के आश्वासन नहीं बल्कि जमीनी कार्रवाई का इंतजार कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो गांव गांव में जनआंदोलन शुरू हो सकता है। क्योंकि बिजली संकट अब केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि जनजीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।