प्रो. मनमोहन शर्मा विज्ञान महर्षी पुरस्कार से सम्मानित

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विफलताओं के बिना आविष्कार संभव नहीं हैं। और यदि आपके पास आविष्कार नहीं होंगे, तो आप नवाचार (इनोवेशन) भी हासिल नहीं कर पाएंगे,” मुंबई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी  के पूर्व निदेशक, रॉयल सोसाइटी (यूके) के फेलो और पद्म विभूषण से सम्मानित प्रोफेसर मन मोहन शर्मा ने यह बात कही। वे एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी  पुणे में प्रतिष्ठित ‘विज्ञान महर्षि पुरस्कार 2026’ स्वीकार करते हुए बोल रहे थे।यह सम्मान ‘राष्ट्रीय वैज्ञानिक गोलमेज सम्मेलन’ (एनएसआरटीसी 2026) के दौरान प्रदान किया गया, जिसका तीन दिवसीय शीर्ष मंच हाल ही में संपन्न हुआ है। इस सम्मेलन में प्रख्यात वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों, शिक्षाविदों और छात्रों ने एक साथ आकर अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रगति पर विचार-विमर्श किया तथा ‘विकसित भारत @ 2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप एक रणनीतिक रोडमैप तैयार किया।इस वार्षिक परिषद में विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, औद्योगिक शोध और राष्ट्र-निर्माण में अद्वितीय योगदान के लिए पद्मविभूषण प्रो. मनमोहन शर्मा को 5 लाख रुपये नकद और सम्मानपत्र स्वरूप अत्यंत प्रतिष्ठित जीवनगौरव पुरस्कार ‘विज्ञान महर्षी 2026’ प्रदान किया गया। इसके साथ ही, डीपटेक क्षेत्र के युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार ‘डीपटेक यंग एंटरप्रेन्योर पुरस्कार’ प्रदान किया गया। प्रत्येक को 1 लाख रुपये नकद और सम्मानपत्र स्वरूप यह पुरस्कार स्मार्टफोन के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता  की सहायता से श्वसन विकारों की स्क्रीनिंग को सरल बनाने वाले ‘श्वासा’  के सह-संस्थापक डॉ. नारायण राव श्रीपाद और समुद्री क्षेत्र में स्वायत्तता व रक्षा क्षेत्र के लिए स्वदेशी रोबोटिक्स तकनीक विकसित करने वाले ‘सागर डिफेंस इंजीनियरिंग’ के संस्थापक कैप्टन निकुंज पराशर को प्रदान किया गया।
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पद्मविभूषण डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने विज्ञान-आधारित उद्यमशीलता पर बल दिया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विश्वविख्यात वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. डॉ. गणपती डी. यादव (पूर्व निदेशक, आईसीटी मुंबई) ने अपने भाषण में उच्च शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत बदलावों की आवश्यकता को रेखांकित किया। read more:https://khabarentertainment.in/cattle-found-below-standards-and-shortage-of-fodder-observed-during-sdms-surprise-inspection/चर्चा को और समृद्ध करते हुए, आईसीटी मुंबई के कुलाधिपति (चांसलर) और पद्म भूषण प्रोफेसर जे. बी. जोशी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रीय धन के सृजन पर बात रखी। उन्होंने कहा कि भले ही भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल कर ली थी, लेकिन देश आज भी विदेशी तकनीक पर निर्भर है। ऐसे में हमें आत्मनिर्भर ज्ञान और नवाचार (इनोवेशन) पर केंद्रित ‘दूसरे स्वतंत्रता संग्राम’ की आवश्यकता है।
वहीं, एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल वी. कराड ने शैक्षणिक संस्थानों के उत्तरदायित्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों और सरकारी निकायों को मिलकर एक ऐसा तंत्र (इकोसिस्टम) तैयार करना चाहिए जो युवाओं में अनुसंधान और खोज की मजबूत सोच को बढ़ावा दे सके।इस तीन दिवसीय परिषद में एआई, सतत ऊर्जा व सामग्री, उभरती डिवाइस तकनीक, न्यू बायोलॉजी व हेल्थ साइंसेज और नोबेल पुरस्कार विजेता शोध — इन 5 महत्वपूर्ण विषयों पर उच्चस्तरीय तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इस परिषद के सफल आयोजन के लिए एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कुलगुरु डॉ. आर. एम. चिटणीस ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत, ‘इंसा’ के अध्यक्ष प्रो. डॉ. शेखर मांडे, एनएसआरटीसी 2026 के अध्यक्ष डॉ. अशोक जोशी, मुख्य प्रशासकीय अधिकारी डॉ. प्रसाद खांडेकर और डीन (शोध व विकास) डॉ. भारत एस. चौधरी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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