बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के क्षेत्रीय अर्थशास्त्र विभाग में नेपाल के शोधार्थी श्री धरम देव भट्ट का पीएचडी शोध-प्रबंध का मौखिक परीक्षण (वाइवा-वॉइस) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने “Evaluation of Socio-Economic Impact of Microfinance on Rural Women: A Case Study of Kailali District in Nepal” विषय पर अपना शोध प्रबंध प्रस्तुत किया। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय एवं विभाग के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि क्षेत्रीय अर्थशास्त्र विभाग में किसी विदेशी शोधार्थी द्वारा पूर्ण की गई यह पहली पीएचडी थीसिस है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा, शोध की गुणवत्ता तथा अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग की संभावनाओं को नई दिशा प्रदान करती है।श्री भट्ट ने अपने शोध में नेपाल के कैलाली जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म वित्त (Microfinance) की भूमिका तथा ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक जीवन पर इसके प्रभावों का विस्तृत अध्ययन और मूल्यांकन किया है। शोध में सूक्ष्म वित्त की उपलब्धता का महिलाओं की आय, बचत, आर्थिक आत्मनिर्भरता, वित्तीय निर्णय लेने की क्षमता, सामाजिक सहभागिता तथा महिला सशक्तिकरण पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया। इसके अतिरिक्त, अध्ययन ने ग्रामीण विकास और वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया में सूक्ष्म वित्त की उपयोगिता, संभावनाओं तथा चुनौतियों को भी रेखांकित किया। बाह्य परीक्षक द्वारा शोध कार्य की सराहना की गई।यह शोध वर्तमान समय में विशेष प्रासंगिकता रखता है, जब भारत, नेपाल सहित अनेक विकासशील देशों में ग्रामीण महिलाओं को औपचारिक वित्तीय सेवाओं से जोड़ने, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा समावेशी विकास को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। अध्ययन के निष्कर्ष महिला-केंद्रित वित्तीय योजनाओं, ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों और विकास नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उपयोगी आधार प्रदान कर सकते हैं।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteइस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से शोधार्थी को बधाई देते हुए कहा गया कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित करना उच्च शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। विभिन्न देशों के शोधार्थियों का विश्वविद्यालय से जुड़ना ज्ञान के आदान-प्रदान और साझा विकास संबंधी चुनौतियों पर शोध को बढ़ावा देता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के शोध कार्य समाज की वास्तविक समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान के लिए उपयोगी सुझाव प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इसकी अकादमिक पहचान को व्यापक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।इस महत्वपूर्ण शोध कार्य का सफल निर्देशन महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष प्रिय द्वारा किया गया। उनके मार्गदर्शन, अकादमिक सहयोग और निरंतर प्रोत्साहन में शोधार्थी ने अपने शोध कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण किया। यह उपलब्धि डॉ. प्रिय के शोध निर्देशन तथा विभाग में गुणवत्तापूर्ण और समाजोपयोगी अनुसंधान को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी रेखांकित करती है।श्री धरम देव भट्ट की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि उच्च शिक्षा और अनुसंधान राष्ट्रीय सीमाओं से परे ज्ञान, अनुभव और विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम हैं। भारत और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के संदर्भ में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन पर केंद्रित इस प्रकार के अध्ययन दोनों देशों की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को समझने तथा संभावित समाधान तलाशने में योगदान दे सकते हैं।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने श्री धरम देव भट्ट को उनकी महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि पर बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही, शोध पर्यवेक्षक प्रो. आशुतोष प्रिय को भी सफल शोध निर्देशन के लिए शुभकामनाएँ दी गईं।क्षेत्रीय अर्थशास्त्र विभाग के लिए यह उपलब्धि विशेष गर्व का विषय है। विभाग को आशा है कि यह शोध कार्य अकादमिक जगत, विकास संस्थानों और नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगा तथा नेपाल सहित अन्य विकासशील देशों में ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार, महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में आगे के शोध एवं नीतिगत प्रयासों को प्रेरित करेगा।
मीडिया सेल, एमजेपीआरयू, बरेली