गाजीपुर (नगवा चौकियां)। जय गुरुबंदे स्वर योग साधना के तत्वावधान में नगवा चौकियां स्थित जय गुरुबंदे आश्रम में तीन दिवसीय सत्संग, भजन और ध्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान संत स्वामी जय गुरुबंदे जी ने प्रवचन देते हुए कहा कि जिन मनुष्यों को जीवन में किसी तत्वदर्शी संत या महापुरुष का सान्निध्य नहीं मिलता, वे ‘निगुरा’ श्रेणी में आते हैं।मीडिया प्रभारी शशिदास द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार स्वामी जी ने कहा कि ऐसे लोग जीवन में वेद-पुराण, कथा-प्रवचन और पूजा-पाठ तो करते हैं, लेकिन उन्हें सच्चा सत्संग नहीं मिल पाता। इसी कारण वे हर बात पर ‘माया’ को दोष देते रहते हैं। वे कहते हैं कि माया के कारण वे सेवा, परोपकार और भजन नहीं कर पा रहे हैं, जबकि स्वामी जी के अनुसार यह मात्र एक भ्रम है।स्वामी जी ने आगे समझाया कि माया को दोष देने वाले लोग अपने कर्मों की जिम्मेदारी से बचते हैं। उन्होंने आध्यात्मिक दृष्टांत देते हुए कहा कि जब मनुष्य मृत्यु के बाद ‘काल की अदालत’ में पहुंचता है, तब माया पर झूठा आरोप लगाने, भक्ति-भजन और सत्संग से दूर रहने के कारण उसे दंड भोगना पड़ता है और जीव को पुनः जन्म-मरण के चक्र में जाना पड़ता है।कार्यक्रम में गंगादास आश्रम के संत भोला दास महाराज तथा जंगीपुर के विधायक वीरेन्द्र यादव भी उपस्थित रहे। इस दौरान विभिन्न स्थानों से आए साधु-संतों ने स्वामी जय गुरुबंदे जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।स्वामी जय गुरुबंदे जी ने अपनी पुस्तक ‘राखी’ में भी माया के विषय में कहा है—“माया माया सब रटा, बचा न जग में कोय,बचा सो जानो जयगुरुबंदे, कृपा संत का होय।रूप, ज्ञान, धन, सम्पदा, वस्तु रहे न कोय,तेरा-मेरा जयगुरुबंदे, वहीं तो माया होय।”उन्होंने अंत में कहा कि संतों की शरण ही जीवन को सही दिशा देती है और माया के भ्रम से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।