चंडीगढ़: पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने ‘गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008’ को बेहद सख्त बना दिया है। 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से पास हुए इस संशोधन बिल को राज्यपाल की अंतिम मंजूरी मिल गई है, जिसके साथ ही अब यह कड़ा कानून पूरे राज्य में प्रभावी हो गया है। इस नए कानून के तहत बेअदबी के दोषियों के लिए सजा का कड़ा प्रावधान करते हुए इसे सीधे उम्रकैद में बदल दिया गया है, जिसका अर्थ है कि दोषी को अपनी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे गुजारनी होगी। इस ऐतिहासिक फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि 2015 से अब तक बेअदबी के लगभग 600 मामले सामने आए हैं, जिनमें न केवल शारीरिक बल्कि डिजिटल माध्यमों से भी अपमानजनक कृत्य किए गए।
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नए कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसने आरोपियों के बचने के तमाम रास्तों को बंद कर दिया है। अब कोई भी व्यक्ति मानसिक बीमारी या डिप्रेशन का बहाना बनाकर कानून की गिरफ्त से बाहर नहीं निकल पाएगा। साथ ही, यदि कोई नाबालिग ऐसी घटना को अंजाम देता है, तो उसके माता-पिता या अभिभावकों को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ज्ञानी रघुबीर सिंह ने इस कदम को सिख समुदाय के लिए बड़ी राहत बताते हुए अपील की है कि धार्मिक मर्यादा के इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र और अन्य राज्य सरकारों से भी आग्रह किया कि वे पंजाब की तर्ज पर सख्त कानून बनाएं ताकि देश में किसी भी धर्म की पवित्र पुस्तक का अनादर न हो सके।