बाराबंकी। भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में शहद को कृषि उत्पादों में शामिल किए जाने के बाद क्षेत्र के मधुमक्खी पालकों को नई उम्मीद मिली है। इसी कड़ी में न्यूजीलैंड हाई कमीशन की टीम ने रविवार को रजौली स्थित शहद प्लांट का निरीक्षण कर उत्पादन प्रक्रिया और गुणवत्ता परीक्षण का जायजा लिया। देवा क्षेत्र के शहद उत्पादक निमित्त सिंह को न्यूजीलैंड फेलोशिप के तहत 12 दिन के अध्ययन दौरे पर भेजा जाएगा। वहां वे विश्व प्रसिद्ध मनुका शहद के उत्पादन की आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और ब्रांडिंग के तरीके सीखेंगे।read more:https://pahaltoday.com/dios-o-p-tripathi-gets-major-relief-from-high-court/लौटने के बाद वे इन तकनीकों का उपयोग कर क्षेत्र में शहद उत्पादन और गुणवत्ता सुधार की दिशा में काम करेंगे। न्यूजीलैंड हाई कमीशन की एग्रीकल्चर काउंसलर मेलानी फिलिप्स, मिनिस्ट्री ऑफ प्राइमरी इंडस्ट्रीज के मुख्य सलाहकार ईशान जयरवर्धने, शहद विशेषज्ञ बायरन पीटर टेलर और प्रियम अरोड़ा ने रविवार को रजौली स्थित शहद प्लांट पहुंचकर मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन की प्रक्रिया को करीब से देखा। निमित्त सिंह ने बताया कि वे लीची, जामुन, सरसों और मल्टी फ्लावर सहित विभिन्न फूलों से शहद तैयार करते हैं। इसके लिए मौसम के अनुसार बिहार, झारखंड, कोलकाता और सुंदरवन क्षेत्रों में मधुमक्खियों के बाक्स भेजे जाते हैं। वहां से प्राप्त शहद को फूलों के आधार पर अलग-अलग प्रोसेस कर बाजार में उपलब्ध कराया जाता है।