जिलाधिकारी का बड़ा निर्देश, पांच साल से पुराने राजस्व वाद हर हाल में हों खत्म, भूमि विवादों पर होगी सख्त कार्रवाई

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आज़मगढ़ ।राजस्व अभिलेखों के डिजिटलीकरण, लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि भूमि विवादों के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अवैध कब्जे का प्रयास करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।शुक्रवार को कैंप कार्यालय से हाइब्रिड मोड में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद की सभी तहसीलों में राजस्व कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मुख्य राजस्व अधिकारी संजीव ओझा, सहायक महानिरीक्षक निबंधन राजेश सिंह, अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) गंभीर सिंह सहित सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार एवं उपनिबंधक ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सरकारी गाटों को छोड़कर सभी अशासकीय गाटों का विवरण शीघ्र उपनिबंधक कार्यालयों को उपलब्ध कराया जाए, ताकि राजस्व अभिलेखों के डिजिटलीकरण और ऑनलाइन प्रविष्टि का कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर शत प्रतिशत पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी उपनिबंधक संबंधित उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रत्येक राजस्व ग्राम की ऑनलाइन प्रविष्टि में तेजी लाएं।विशेष अभियान के तहत राजस्व संहिता की धारा 34 के वादों, 45 दिनों से कम अवधि के लंबित मामलों और अंश निर्धारण संबंधी प्रकरणों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक जनता दर्शन में बैठकर आमजन की समस्याएं सुनें और उसके बाद नियमित रूप से न्यायालय संचालित करते हुए लंबित मामलों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण करें।read more:https://pahaltoday.com/mohsina-kidwai-passes-away-an-era-has-come-to-an-end/जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पांच वर्ष से अधिक पुराने कोई भी राजस्व वाद अब लंबित नहीं रहने चाहिए। ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण किया जाए, ताकि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को राहत मिल सके।उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी शिकायतों का केवल औपचारिक निस्तारण नहीं, बल्कि स्थायी समाधान किया जाए। जिन व्यक्तियों द्वारा बार बार सरकारी या निजी भूमि पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जाता है, उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लग सके।बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों को ईआरके पटल की नियमित निगरानी करने तथा लंबित प्रकरणों की सतत समीक्षा कर निर्धारित समय सीमा के भीतर उनका निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इसके साथ ही जिलाधिकारी ने मुख्य राजस्व अधिकारी को अन्नपूर्णा भवन, स्वास्थ्य केंद्रों तथा अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए आवश्यक भूमि समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं में भूमि संबंधी किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए शासन की प्राथमिकताओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करें।बैठक के अंत में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि राजस्व प्रशासन का उद्देश्य केवल अभिलेखों का रखरखाव नहीं, बल्कि आम नागरिकों को त्वरित न्याय, पारदर्शी व्यवस्था और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना है। सभी अधिकारी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें ताकि जनता का प्रशासन पर विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।

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