गागलहेड़ी (सहारनपुर)। श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले लंबी दूरी के कांवड़ियों की आवाजाही तेज हो गई है। हरियाणा और राजस्थान के श्रद्धालु गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशासनिक स्तर पर कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर बैठकों का दौर जारी है, लेकिन कई स्थानों पर अभी तक कांवड़ मार्ग की मरम्मत और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। हरियाणा के कैथल निवासी अंकुश और संगम, जो कक्षा 12 के छात्र हैं, हरिद्वार से क्रमशः 61 और 41 लीटर गंगाजल लेकर लौट रहे हैं। संगम ने बताया कि उनके परिवार की भगवान शिव में गहरी आस्था है और भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए वह हर वर्ष कांवड़ यात्रा करते हैं।read more:https://khabarentertainment.in/major-action-by-the-food-safety-department-sauce-factory-raided-550-kg-of-stock-destroyed/वहीं राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी भारत और विकास गौ संरक्षण की कामना के साथ पहली बार हरिद्वार से 14 और 26 लीटर गंगाजल लेकर लौट रहे हैं। भारत ने बताया कि उन्होंने 4 जुलाई को हरिद्वार से कांवड़ यात्रा शुरू की थी और 11 अगस्त को श्रीगंगानगर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। उन्होंने दावा किया कि यह श्रीगंगानगर पहुंचने वाली पहली कलश कांवड़ होगी। श्रावण मास में शिव चतुर्दशी पर जलाभिषेक के लिए लंबी दूरी के कांवड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यात्रा शुरू होने के बावजूद कई स्थानों पर कांवड़ मार्ग की मरम्मत, सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि कांवड़ यात्रा के सुचारु संचालन के लिए सभी तैयारियां समय रहते पूरी कराई जाएं, ताकि शिवभक्तों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।