भदोही। जिले का नाम बदले जाने के बाद जनपद का सियासी पारा गर्मा गया है। शुक्रवार को जनता दल (यूनाइटेड) के जिलाध्यक्ष सर्वेश राय ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा। जिसमें उन्होंने जनपद का नाम संत रविदास नगर न करके भदोही ही रहने देने की मांग की। इस दौरान सर्वेश राय ने कहा कि भदोही पहले वाराणसी जनपद का हिस्सा था। 30 जून 1994 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा भदोही को प्रदेश का 65वां जिला घोषित किया गया था। 4 दिसंबर 1997 को मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार द्वारा जनपद का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया गया था। इस नाम परिवर्तन को लेकर जनपद में लम्बा आंदोलन चला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता ने 12 नवंबर 1999 को जिले के नाम में ‘संत रविदास नगर’ के साथ भदोही को भी जोड़ दिया।जनपद का मूल नाम भदोही किए जाने की मांग तब भी निरंतर जारी रही, क्योंकि भदोही नाम विश्वभर में अपनी सुंदर कालीनों के लिए प्रसिद्ध है। यहां की कालीनें देश-विदेश में निर्यात की जाती हैं तथा भदोही के कालीन को जीआई टैग भी प्राप्त है। विदेशी मुद्रा अर्जन में महत्वपूर्ण योगदान के कारण ही भदोही को अलग जिला बनाया गया था। श्री राय ने कहा कि कालीन निर्यातकों एवं जनमानस की मांग पर समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव की सरकार द्वारा 6 दिसंबर 2014 को पुनः जिले का नाम भदोही कर दिया गया था। किन्तु 29 जुलाई 2026 को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पुनः जनपद का नाम ‘संत रविदास नगर’ कर दिया गया है, जबकि संत रविदास जी का जन्म वाराणसी में हुआ था। उन्होंने कहा कि जनहित, ऐतिहासिक पहचान एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति को ध्यान में रखते हुए जनपद भदोही का नाम भदोही ही रहने दिया जाए। देश-विदेश में यह जिला ‘भदोही’ के नाम से ही प्रसिद्ध है।इस मौके पर सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक रामेश्वर प्रसाद राय, अबरार अहमद अंसारी, परवेज हसन सीबू, रोहित सिंह, डॉ.एसडी बिंद व अभिनय श्रीवास्तव आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।