मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रणविजय सिंह के आदेश पर गजनेर थाना अध्यक्ष को मुकदमा दर्ज करने का दिया निर्देश

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हरिकृष्ण कश्यप कानपुर देहात मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रणविजय सिंह के आदेश पर गजनेर थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज करने का निर्देश, पूर्व विवाह छिपाकर शादी शारीरिक संबंध और दहेज मांगने का गंभीर मामला पीड़िता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने की पैरवी पूर्व विवाह छिपाकर स्वयं को अविवाहित बताकर शादी करने, शारीरिक संबंध स्थापित करने, विवाह के बाद स्कॉर्पियो कार और दान-दहेज लेने, आभूषण वापस न करने तथा विरोध पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रणविजय सिंह ने गजनेर थानाध्यक्ष को मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना करने का आदेश दिया है। न्यायालय के आदेश के अनुसार मुकदमा अभय प्रताप सिंह उर्फ लाखन, उसकी पूर्व पत्नी दीपिका पुत्री अरुण कुमार,महेंद्र प्रताप सिंह निशा सिंह शिवांगी सिंह ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह राघवेन्द्र प्रताप सिंह संबंधित आरोपियों के विरुद्ध पंजीकृत किया जाने का आदेश दिया है। आदेश में यह आरोप है कि अभय प्रताप सिंह का दीपिका पुत्री अरुण कुमार के साथ पूर्व में विवाह हो चुका था और इस तथ्य की जानकारी आरोपियों को थी। इसके बावजूद पीड़िता का विवाह  अभय प्रताप सिंह के साथ कराया गया।
पीड़िता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि आरोपी का पहले ही विवाह हो चुका था, लेकिन यह तथ्य छिपाकर पीड़िता से विवाह किया गया।शारीरिक सम्बन्ध बनाए।विवाह दबाव में  स्कॉर्पियो कार और भारी दान-दहेज आरोपियों ने लिया । स्कॉर्पियो कार की करीब 24,000 रुपये प्रतिमाह की किस्त पीड़िता के पिता और उसका परिवार भर रहा है। कार आरोपियों के पास है।आरोप है कि विवाह तय होने के बाद आरोपी पक्ष की ओर से स्कॉर्पियो कार और रुपये की अतिरिक्त मांग भी की गई।पीड़िता के अनुसार, विवाह के बाद उसके निजी आभूषण ससुरालीजनों ने अपने पास रख लिए और मांगने पर वापस नहीं किए। पूर्व विवाह की जानकारी होने पर विरोध करने पर उसे मायके छोड़ दिया गया तथा शिकायत करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। पुलिस में शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज न होने पर पीड़िता ने वरिष्ठ अधिवक्ता  जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान के माध्यम से न्यायालय की शरण ली।प्रार्थना पत्र और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रणविजय सिंह ने प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए गजनेर थानाध्यक्ष को धारा 173(4) भा.ना.सु.सं. के तहत सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर विधि के अनुसार विवेचना करने का आदेश दिया। जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि बेटी के विवाह में पिता अपनी जीवनभर की कमाई लगाता है। ऐसे में पूर्व विवाह छिपाकर धोखे से शादी करना, शारीरिक संबंध बनाना और विवाह के बाद कार व रुपये की मांग करना गंभीर अपराध है। मामले में निष्पक्ष विवेचना कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए।

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