सोनभद्र। ओबरा तहसील अंतर्गत खेवंधा गांव स्थित रेणु नदी इन दिनों अवैध खनन से कराह रही है। यहां बालू खनन पट्टा के आड़ में प्रतिबंधित मशीनों के जरिए 24 घंटे खुलेआम बालू की निकासी करायी जा रही है। जबकि नियमानुसार बालू खनन के लिए वन विभाग द्वारा जारी एनओसी में रात्रि खनन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। यहीं नहीं इस बालू साइड पर एनजीटी के सख्त आदेशों और शासन की स्पष्ट गाइडलाइन का भी कोई मोल नहीं रह गया है।read more:https://khabarentertainment.in/bjps-assembly-level-seminar-on-ambedkar-jayanti-gave-the-message-of-equality-and-harmony-in-the-society/भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि खेवंधा गांव स्थित रेणू नदी में ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एच नंबर 62 ट्रांसपोर्ट नगर कोरबा छत्तीसगढ़ निवासी सचिन अग्रवाल के नाम से अराजी संख्या 246 (खण्ड स) में करीब 7 हेक्टेयर में नियमानुसार बालू खनन के लिए लीज आवंटित की गई है। आरोप है बगैर सीमांकन के संचालित इस लीज के आड में निर्धारित क्षेत्र से बाहर निकलकर बड़े पैमाने पर अवैध खनन कराया जा रहा है। आधा दर्जन से अधिक लिफ्टिंग मशीनें (नाव) नदी के बीचों-बीच तैनात हैं, जो लगातार नदी के गर्भ से बालू निकाल रही हैं। जबकि उप खनिज परिहार नियमावली के नियम 42 ज के तहत नदी में लिफ्टिंग मशीनों का प्रयोग वर्जित है। इतना ही नहीं, नदी के जलधारा को रोककर बनाई गई अस्थायी सड़क से रोजाना दर्जनों ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही हो रही है। इस अवैध खनन ने रेणु नदी के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। नदी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से खत्म हो रहा है और जलीय जीव-जंतुओं का जीवन खतरे में है। समाज के प्रबुद्धजनों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में यह क्षेत्र गंभीर पारिस्थितिक असंतुलन का सामना कर सकता है। सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर उठ रहा है। ओबरा क्षेत्र में एसडीएम, तहसीलदार और जुगैल पुलिस की मौजूदगी के बावजूद अवैैध खनन का खेल लगातार जारी है। उधर मामले को लेकर जेष्ठ खान अधिकारी से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे मौजूद नहीं मिले। लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।कार्रवाई के दावे, जमीनी हकीकत फेल लीज के आड़ में चल रहे अवैध खनन के काले कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए जिलाधिकारी ने टास्क फोर्स का गठन किया है। टास्क फोर्स में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। यहीं नहीं, पुलिस अधीक्षक द्वारा भी अवैध खनन व परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए व्हाट्सएप नंबर जारी किया गया है। बावजूद इसके ओबरा तहसील के खेवंधा गांव स्थित रेणु नदी में ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रो. सचिन अग्रवाल के नाम से आवंटित लीज के आड में प्रतिबंधित मशीनों के जरिए नदी की जलधारा रोककर 24 घंटे बालू की निकासी कराए जाने का गोरखधंधा चरम पर है। तमाम पावंदियों के बावजूद चल रहे इस काले कारोबार पर अंकुश न लगाने से प्रशासनिक अधिकारियों की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में है। लोगों का कहना है कि बिना प्रशासनिक सहयोग के इतने बड़े स्तर पर खनन संभव नहीं है।